खुद से बात




ये नगमे तुम जो गुनगुनाते हो दिन रात
ये कसमें तुम जो खाते हो सुबह शाम,
हर पल हर घड़ी खुद से करते हो बात
खाते हो गोते भूल जाते हो नाम.
आँखें खुली रहती हैं और सोते हो दिन रात
काम करते-2 ख़्वाब ‘और’ बनाते हो बात.
किताबों में चेहरे से बात करते,
अक्षरों को प्रश्न मान कर हल करते.
कभी फेल कभी पास हो जाते हो
इक पल हँस कर हर पल रोते रहते हो
क्यूँ कमज़ोर हो जाते हो ? खुद से थक जाते ?
क्यूँ नहीं हँसते हो सपनों के नहीं हैं किसी से
नाते.
रंग दे  हक़ीकत से ज़िन्दगी
ख़्वाब भी करेगें तुझसे बंदगी. 

-श्री निवास द्विवेदी यू  



मैं वो दीवाना हूँ..


मैं वो दीवाना हूँ जिसको दीवानगी से नफरत है
मैं वो परवाना हूँ जिसको न खुदी से फुर्सत है
ऐ वक्त के सह्सफ़र जरा रुक तो
तेरे साथ चलूँगा
जारा पीछे मुड़ तो मैं तेरे साथ धूप मलूँगा
तुझसे कुछ बात करता हूँ, कूछ तेरे मन की कुछ अपने मन की साथ करता हूँ
ऐ परवाने सुन जरा तू उठ जा जरा
वक्त का साथ कर हमसफर खुद मिलेगा 
रब को याद करतू कुछ हरकत...
ऐ वक्त के पुजारी मैं नहीं हूँ कोई भिखारी
जो वक्त से फ़रियाद करूँ खुदा के बनाये जिस्म को बर्बाद करूँ..
वक्त क्या चीज है ? खुदा ने भी सलाम कहा है
लैला मंजनू सभी ने यही कहा
ऐ हठी! तू हठ न कर, वक्त मेरा बर्बाद न कर
तू मेरा राह छोड़, अपनी नाक फोड़.
वक्त के पीछे चलते हैं सभी,
ये पीछा किसी का नही करता है कभी
रजा हो प्रजा वक्त ने सब को दास बनाया
जवानी बुढापा या फिर हो बचपन सबको भुनाया
मत रुक चल कर बरकत...
           -
श्री निवास द्विवेदी यू
 

 



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यूपी चुनाव -2017


तलाक तलाक तलाक

अबकी बार किसके तलाक की है बारी

बसपा कांग्रेस भजपा या है सपा की बारी.

सोम-रस की नदियाँ जो बहायेगा

जनता को वश में वही कर पायेगा

जो साड़ी पहनायेगा

सेहरा उसी के सर पे जायेगा.

नेता जी ! बनारस के फेर में मत रहना

यूपी बहुत भारी है

करनी अभी आपको बहुत तैयारी है

यूपी वही जहाँ जौनपुर है आजमगढ़

बुंदेलखंड संतकबीर नगर और हरदोई

रख कर दीन ध्यान उडाना सुखोई .

अयोध्या से भी गुजरना है मथुरा काशी से भी

देवा और किछौछे से भी 

पटरी पर बैठने वालों से भी मिलना है

और पटरी पर चलने वालों से भी.

किसी को नकद की दरकार किसी को नारायण की

इन सब से गुजर रहे होओगे तो दिखेगी जमात किसनो की

एक अदद से दरकार है जिनको कृषी में चमत्कार की.

कहीं युवाक्रोश मिलेगा तो कहीं स्त्री उत्पीडन

कहीं अस्मिता तो कहीं दिखेगी तरुनाई करती चूल्हा-चक्की.

ये सब हैं निगेटिव, बनानी है जिनकी तस्वीर पॉजटिव.
                    -श्री निवास द्विवेदी यू