मैं वो दीवाना हूँ..


मैं वो दीवाना हूँ जिसको दीवानगी से नफरत है
मैं वो परवाना हूँ जिसको न खुदी से फुर्सत है
ऐ वक्त के सह्सफ़र जरा रुक तो
तेरे साथ चलूँगा
जारा पीछे मुड़ तो मैं तेरे साथ धूप मलूँगा
तुझसे कुछ बात करता हूँ, कूछ तेरे मन की कुछ अपने मन की साथ करता हूँ
ऐ परवाने सुन जरा तू उठ जा जरा
वक्त का साथ कर हमसफर खुद मिलेगा 
रब को याद करतू कुछ हरकत...
ऐ वक्त के पुजारी मैं नहीं हूँ कोई भिखारी
जो वक्त से फ़रियाद करूँ खुदा के बनाये जिस्म को बर्बाद करूँ..
वक्त क्या चीज है ? खुदा ने भी सलाम कहा है
लैला मंजनू सभी ने यही कहा
ऐ हठी! तू हठ न कर, वक्त मेरा बर्बाद न कर
तू मेरा राह छोड़, अपनी नाक फोड़.
वक्त के पीछे चलते हैं सभी,
ये पीछा किसी का नही करता है कभी
रजा हो प्रजा वक्त ने सब को दास बनाया
जवानी बुढापा या फिर हो बचपन सबको भुनाया
मत रुक चल कर बरकत...
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श्री निवास द्विवेदी यू
 

 



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