बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी के जन्म जयंती पर उनको नमन करता हूं और उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए समस्त देश वासी की तरफ से आभार और धन्यवाद करता हूं 🙏।
आज एक बड़ा ही सूक्ष्म पर गंभीर मुद्दा जो कि संविधान के तत्व में से एक है "पद और योग्यता" पर विचार करने का सुअवसर है। और वो यह कि समाज में संविधान द्वारा प्रत्येक पद की गरिमा और योग्यता तय की गई है। किन्तु देश के शासन प्रशासन के नीतियों का निर्माण और निर्धारण करते वाले सदनों संसद, विधानसभा एवं राज्यसभा के सदस्यो के शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण करना शेष है। समय के साथ अब इसकी आवश्कता है कि जिस भारत देश में लिखित संविधान है वहां पर उसको अमल में लेने वाले अनपढ़ या फिर कम पढ़े हैं, जो संविधान की शपथ तो जरूर खाते है परन्तु वास्तव में उसके स्वरूप और स्वभाव से अनभिज्ञ होते है। ऐसा संविधान के साथ विश्वाघात के जैसा है।
ये विचार करिए की जो व्यक्ति शिक्षित है उसे संविधान और उसके गुण समझने और अपनाने में अभ्यास करना पड़ता है तो जो अशिक्षित है या काम पढ़े है वो उसको कैसे समझे या अभ्यास में लाएं ?
भारतीए लोकतन्त्र की विडम्बना है कि पढे लिखे होनहार अधिकारी उन अनपढ़ और अनगढ़ लोगो कि भौहों के साथ कदमताल करते है जो किसी सदन के सदस्य है। बाबा साब ऐसा तब के परिपेक्ष्य में गलत था और आज भी है। एक कवि इसी विडंबना से आहत हो कहता है-
"जो हैं पढ़े लिखे वो सब संतरी बने.
अनपढ़ और अपराधी है मंत्री बने।" आज आवश्कता है कि इस भूल को सुधारा जाए। आज बाबा साब के जयंती पर हम सभी भारतीय नागरिक को इस पर प्राथमिकता से सोचना चाहिए और इसे अमल में लेना चाहिए।
इस सूक्षम त्रुटि के भयंकर परिणाम हैं संविधान की सपथ खाने वाले अक्सर किसी ना किसी गैरसंवैधानिक कार्यों में संलिप्त पाए जाते है दरसअल उनने ना तो काभी संविधान पढ़ा होता है ना सुना।
पढ़े लिखे आईएएस और पीसीएस ’नेता जी’ के हर कदम पर संविधान को साधाते जाते हैं क्योंकि वो जनता द्वारा चुन के आए हैं और वो चयन परीक्षा के द्वारा। अब यहां एक नई समस्या आ गई की चयन परीक्षा से चुन कर आए और चुनाव से चुन कर आए अभ्यर्थी में कोन श्रेष्ठ ? ये एक व्यावहारिक प्रश्न है जो चीख रहा है लोकतन्त्र के सामने हर रोज पर कोई सुनवाई नहीं। ये बेबसी है लोकतंत्र की या उसके रखवालों का जाहिलपन ?
क्या ये लोकतन्त्र के दोष मान कर हम हाथ पर हाथ रख बैठ रहें या आगे बढ़ कर इस समस्या का समाधान निकाला जाए। मुझे लगत है हर समस्या का समाधान है और उसे हल किया जाना चाहिए।
मेरा सभी आईएएस और पीसीएस एवं अन्य सरकारी या निजी क्षेत्र से जुड़े सभी लोग जो भारत निर्माण में सहयोग दे रहे हैं का आह्वान करता हूं कि एक स्वानिश्चित अवधि सेवा के बाद राजनीत में आवश्य एक पारी खेले और एक स्वस्थ एवं समर्थ्य सदन निर्माण के कार्य में योगदान दें। समाज को एक नई दिश एवं सोच देने की जरूरत है। अशा हैं आप सभी अपने और अपनों के उज्जवल-धवल भविष्य के लिए आवश्य कदम बढ़ाएंगे। धन्यवाद।
✍️श्री निवास द्विवेदी।
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