जयनगर गांव के लोग अब सरकार को ना कोई लगान देते अपने जोत वाली जमीन का और ना ही किसी प्रकार की सुविधा की अपेक्षा रखते हैं बल्कि वह स्वयं अपने पर निर्भर हैं। सारे लोग गांव की सड़क, बिजली व पानी के साथ साथ, साफ सफाई का पूरा इंतजाम खुद से कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार जो जनता का पैसा विभिन्न रूपों में ले लेती है जैसे सभी प्रकार के कर। और उसे पब्लिक को वापस कर देती है। सड़कें, नाली, बिजली, पानी व साफ सफाई के सुविधाओं के द्वारा और खाद तेल पर सब्सिडी यह पैसे जनता को मिल जाते हैं। जो कि हम लोगों को नहीं चाहिए। अपने गांव घर की सारी सुविधा साज-सज्जा एवं प्रबंधन हम स्वयं कर लेंगे। बस सरकार यह जितने बैट हैं और सुविधा शुल्क हैं हटा ले।
हम लोग अपनी सारी भौतिक सुख एवं सुविधाओं का खर्च खुद से वहन करना चाहते हैं।अतः हम आज से धरने पर बैठ रहे हैं। और सरकार से दरखास्त करते हैं कि वह हमारी बात को माने और हमें सभी कर से छूट दे। क्योंकि अभी तक सरकार ने ना हमारे गांव तक लाइट पहुंचाई है। और ना ही सड़कें। यह जो सब आप देख रहे हैं वह गांव श्रमिकों के पसीने का फल है। इसीलिए सरकार हमारे सारे कर माफ करें हम लोग सारे सुख सुविधा खुद से उपलब्ध करा रहे हैं। हमारे यहां कोई सरकारी योजना अभी तक रोशनी नहीं ला पाई थी। जिसको हमारे गांव में लोगों ने अथक परिश्रम आर्थिक योगदान देकर उपलब्ध कराया है।
वर्तमान समय स्पीड का है अतः हमने जो भी यह भौतिकता गांव को प्रदान की है वह सब हमारे अथक प्रयासों का नतीजा है। हमने इस में धन और तन के साथ-साथ मन का भी पूरा इस्तेमाल किया है। और जिस गांव में खड़ंजा नहीं थे उसी गांव में सीसी सड़कें बना ली गई हैं। तथा उसके साफ सफाई के लिए कार्यकर्ता भी नियुक्त कर लिए हैं हमने। तथा उनके पारिश्रमिक का भी पूरा पूरा ख्याल रखा गया है। अब गांव के किसी कोने व रास्ते पर नाली का पानी नहीं मिलेगा। कोई मलेरिया हैजा का मरीज नहीं मिलेगा। सब स्वस्थ हैं। इतना ही नहीं पूरे गांव में नशा करने वाले भी आपको नहीं मिलेंगे। इन सब के साथ साथ जगह-जगह आपको कूड़ा दान भी मिलेंगे। जहां आपको कूड़ा डालना है।
कृषकों को साग सब्जी उगाने तथा उनके बेचने के लिए बाजार की व्यवस्था है। तथा गांव वाले इन्हीं दुकानों से ही सामान खरीदते हैं वह दूसरे गांव को भी बुलाते हैं कि आप हमारे यहां लगने वाले बाजार से ही सामान ले औरअपना समान बेचें भी। और वह गुणवत्ता परक खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं। वह सारे आत्मनिर्भर बनकर जीवन जीना चाहते हैं। वो नहीं चाहते कि सरकार पागल बना कर राजनीतिक रोटी सेकती रहे। और वो अपने बाल बच्चों को जीवन की मूलभूत सुख सुविधाओं से वंचित रख कर इस आशा में बैठे रहे कि सरकार तो सब्सिडी देगी। कोई योजना बनाएगी और हम मुफ्त की योजना के लिए आशा करते करते बूढ़े हो जाएं। ना हमें मिले और ना ही हम सक्षम रहें अपने आने वाली पीढ़ी को देने के लिए। हम ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते।
हम अपने बल पर पैरों पर खड़े होकर फौलादी हाथों से अपने भविष्य के उन्नत मस्तक को सफलता का हार एवं खुशी का सेहरा पर पहनाना चाहते हैं।
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