self value

आज रात कुछ घंटों की नींद के बाद नींद उचट गई मुझसे।
कुछ मानमनौव्वल किया मगर बात बनी नहीं।
तो सोचा कुछ किया जाए। काफी उधेड़ बुन के बाद पता चला इतनी रात गए टीवी छेड़ना अच्छा नहीं होगा मूवी देखने का मन भी नहीं हुआ। नींद को ढूढ़ता रहा मगर वो भी दस्तक नहीं दी। बैचलर लाइफ में अब खुराफात सूझ तो रही है किन्तु कमरे से बाहर जाना भी मुश्किल क्योंकि बाहर शीतलहर जारी है। आधी रात का समय है क्या ही किया जाए ? 
कई सवाल और उनके उत्तर भी कई।
बात फिर आके बनी अपने पुराने शौक लेखन पर।
तो सोचा कुछ नए नए नक्शे कुछ नई शब्द चित्र रचने की सो सफर शुरू है। आप जानते हैं कि रात इंशन के विकास में अहम रोल प्ले करती है। सारे दिन के व्यस्त शेड्यूल से फ्री होकर जब इंशान अपने आशियाने पर आता है तब ही कुछ अपने बारे में वा शरीर के बारे में सोचने की स्थिति में आता है। फिर भी दिन के पेंडिंग रहा गए कार्य पर दिमाग कसरत करता रहता है। बीते हुए दिन कि और आते हुए दिन की नई नई आशाओं आँकाक्षाओं से घिरा व्यक्ति स्वयं के लिए सोचे या कुछ करें तो कब ?
दिन भर का ऑफिस शेड्यूल, शाम का फैमिली शेड्यूल और फिर बच्चों का शेड्यूल (अगर हैं तो) इनमें ही 24 घंटे जाने हैं।  स्वयं को देख सके या फिर कहें कि स्वयं के अंदर झांक सकें इतना समय निकाल पाना थोड़ा कठिन सा होता जा रहा है। फिर भी कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, निकल ही आता है समय कभी कभी।

परन्तु फिर वही पुरानी बात रेगुलर नहीं हो पातीं, चीजें बीच मे ही छूट जाती है। कभी कभार समय मिला तो हो गया स्वयं से साक्षातकार। हालांकि  ये एक विशेष मानसिक अवस्था होने के साथ साथ विशेष शारीरिक कला भी है। कुछ खास तो नहीं है किन्तु खास से काम भी नहीं है।
स्वयं पर ध्यान को संतुलित रखना एक उच्च कोटि की योग   पद्धति है। इसका सही आंकलन हम आप टाइम मैनेजमेंट से कर सकते हैं। 
टाइम मैनेजमेंट एक कला है, जो हम मनुष्य को कार्य समय से और समय पर पूरा करने की शिक्षा देती है। जिसके  माध्यम से हम आप अपने डेली लाइफ का शेड्यूल तैयार करके प्रत्येक कार्य को एक निश्चित समय में तय करने का टाइम पीरियड डिसाइड करते हैं। किन्तु परिस्थितियां मनुष्य को बार बार अप डाऊन करती रहती हैं। जिससे मनुष्य टाइम मैनेजमेंट के चक्कर में सेल्फ मैनेजमेंट करने का टाइम मैनेज नही कर पा रहा। 
कभी कभार ये समय यदि मिल जाता है तो रात का जब आप पार्टीस से, दोस्तों से, कलीग से या फिर फैमिली से समय निकाल पाए तो। स्वयं पर फोकस कर सकते हैं।
अपने अंदर झांकने की हिमाकत कर सकते हैं तब।
फिर आप अपने रिजाल्युसन और प्रियोर्टी को दोहरा सकते हैं।
 आप स्वयं से पूछ सकते हैं क्या आप अपने प्रायरटी को ध्यान दे पा रहें हैं ? क्या आपकी प्रॉमिस पूरी हो रही है ? 

आप इन सभी सवालों को खुद से पूछते जरूर होंगें हां इनके शक्ल बदले जरूर हो सकते हैं। 
यदि आप का उत्तर हां हैं टारगेट्स टाइम पर पूरे हो रहे हैं और आप स्वस्थ हैं तो आप स्वयं पर ध्यान दे रहें हैं। और यदि आप परिस्थितियों के कारण अप डाऊन झेल रहे हैं तो आप ठहर कर स्वयं का मूल्यांकन अवश्य करें। 
ये एक बहुत मामूली सा टास्क लगता है पर यदि समय पर ना हो तो भारीभरकम टेंशन बन कर रहता है। 
तो स्वयं पर ध्यान दें साल 2020 अपने आखिरी सप्ताह की ओर है नया साल जोश खरोश के साथ आ रहा है यह उचित समय है जब स्वयं को तैयार कर लेना चाहिए अपने सभी टारगेट्स और ड्यूटीज के लिए।

एक गांव ऐसा भी

जयनगर गांव के लोग अब सरकार को ना कोई लगान देते अपने जोत वाली जमीन का और ना ही किसी प्रकार की सुविधा की अपेक्षा रखते हैं बल्कि वह स्वयं अपने पर निर्भर हैं। सारे लोग गांव की सड़क, बिजली व पानी के साथ साथ, साफ सफाई का पूरा इंतजाम खुद से कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार जो जनता का पैसा विभिन्न रूपों में ले लेती है जैसे सभी प्रकार के कर। और उसे पब्लिक को वापस कर देती है। सड़कें, नाली, बिजली, पानी व साफ सफाई के सुविधाओं के द्वारा और खाद तेल पर सब्सिडी यह पैसे जनता को मिल जाते हैं। जो कि हम लोगों को नहीं चाहिए। अपने गांव घर की सारी सुविधा साज-सज्जा एवं प्रबंधन हम स्वयं कर लेंगे। बस सरकार यह जितने बैट हैं और सुविधा शुल्क हैं हटा ले। 

हम लोग अपनी सारी भौतिक सुख एवं सुविधाओं का खर्च खुद से वहन करना चाहते हैं।अतः हम आज से धरने पर बैठ रहे हैं। और सरकार से दरखास्त करते हैं कि वह हमारी बात को माने और हमें सभी कर से छूट दे। क्योंकि अभी तक सरकार ने ना हमारे गांव तक लाइट पहुंचाई है। और ना ही सड़कें। यह जो सब आप देख रहे हैं वह गांव श्रमिकों के पसीने का फल है। इसीलिए सरकार हमारे सारे कर माफ करें हम लोग सारे सुख सुविधा खुद से उपलब्ध करा रहे हैं। हमारे यहां कोई सरकारी योजना अभी तक रोशनी नहीं ला पाई थी। जिसको हमारे गांव में लोगों ने अथक परिश्रम आर्थिक योगदान देकर उपलब्ध कराया है।

 वर्तमान समय स्पीड का है अतः हमने जो भी यह भौतिकता गांव को प्रदान की है वह सब हमारे अथक प्रयासों का नतीजा है। हमने इस में धन और तन के साथ-साथ मन का भी पूरा इस्तेमाल किया है। और जिस गांव में खड़ंजा नहीं थे उसी गांव में सीसी सड़कें बना ली गई हैं। तथा उसके साफ सफाई के लिए कार्यकर्ता भी नियुक्त कर लिए हैं हमने। तथा उनके पारिश्रमिक का भी पूरा पूरा ख्याल रखा गया है। अब गांव के किसी कोने व रास्ते पर नाली का पानी नहीं मिलेगा। कोई मलेरिया हैजा का मरीज नहीं मिलेगा। सब स्वस्थ हैं। इतना ही नहीं पूरे गांव में नशा करने वाले भी आपको नहीं मिलेंगे। इन सब के साथ साथ जगह-जगह आपको कूड़ा दान भी मिलेंगे। जहां आपको कूड़ा डालना है।

कृषकों को साग सब्जी उगाने तथा उनके बेचने के लिए बाजार की व्यवस्था है। तथा गांव वाले इन्हीं दुकानों से ही सामान खरीदते हैं वह दूसरे गांव को भी बुलाते हैं कि आप हमारे यहां लगने वाले बाजार से ही सामान ले औरअपना समान बेचें भी। और वह गुणवत्ता परक खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं। वह सारे आत्मनिर्भर बनकर जीवन जीना चाहते हैं। वो नहीं चाहते कि सरकार पागल बना कर राजनीतिक रोटी सेकती रहे। और वो अपने बाल बच्चों को जीवन की मूलभूत सुख सुविधाओं से वंचित रख कर इस आशा में बैठे रहे कि सरकार तो सब्सिडी देगी। कोई योजना बनाएगी और हम मुफ्त की योजना के लिए आशा करते करते बूढ़े हो जाएं। ना हमें मिले और ना ही हम सक्षम रहें अपने आने वाली पीढ़ी को देने के लिए। हम ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते।

 हम अपने बल पर पैरों पर खड़े होकर फौलादी हाथों से अपने भविष्य के उन्नत मस्तक को सफलता का हार एवं खुशी का सेहरा पर पहनाना चाहते हैं।

वो हर रोज आती है..

O har roz aati hai,
Aur bina bataye chali jati hai.
Natkhat hai, 
Ayene ke bhitar se shaitaniya krti hai.
Pyari hai,
Galtiya na kare fir bhi har baat me sorry bolti hai.
Bholi hai,
Nafa nuksan nhi dekhti sach bolti hai.

Kya kahu use, 
O khud ko pagal kahti hai.
Shayad iss liye ki o apne me vyast rhti hai.
Sapne nhi dekhti sach ko jiti hai.
Lift nhi leti hai, 
safar me akele chalti hai.

Dhyan sabka rakhti hai,
Khud ka nhi.
Din bhar ulajhti hai, 
Sahi-galat  galat-sahi.

बाबा साहेब

बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी के जन्म जयंती पर उनको नमन करता हूं और उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए समस्त देश वासी की तरफ से आभार और धन्यवाद करता हूं 🙏।
आज एक बड़ा ही सूक्ष्म पर गंभीर मुद्दा जो कि संविधान के तत्व में से एक है "पद और योग्यता" पर विचार करने का सुअवसर है। और वो यह कि समाज में संविधान द्वारा प्रत्येक पद की गरिमा और योग्यता तय की गई है। किन्तु देश के शासन प्रशासन के नीतियों का निर्माण और  निर्धारण करते वाले सदनों संसद, विधानसभा एवं राज्यसभा  के सदस्यो के शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण करना शेष है। समय के साथ अब इसकी आवश्कता है कि जिस भारत देश में लिखित संविधान है वहां पर उसको अमल में लेने वाले अनपढ़ या फिर कम पढ़े हैं, जो संविधान की शपथ तो जरूर खाते है परन्तु वास्तव में उसके स्वरूप और स्वभाव से अनभिज्ञ होते है। ऐसा संविधान के साथ विश्वाघात के जैसा है।
ये विचार करिए की जो व्यक्ति शिक्षित है उसे संविधान और उसके गुण समझने और अपनाने में अभ्यास करना पड़ता है तो जो अशिक्षित है या काम पढ़े है वो उसको कैसे समझे या अभ्यास में लाएं ? 
भारतीए लोकतन्त्र की विडम्बना है कि पढे लिखे होनहार अधिकारी उन अनपढ़ और अनगढ़ लोगो कि भौहों के  साथ कदमताल करते है जो किसी सदन के सदस्य है। बाबा साब ऐसा तब के परिपेक्ष्य में गलत था और आज भी है। एक कवि इसी विडंबना से आहत हो कहता है- 
"जो हैं पढ़े लिखे वो सब संतरी बने.
अनपढ़ और अपराधी है मंत्री बने।" आज आवश्कता है कि इस भूल को सुधारा जाए। आज बाबा साब के जयंती पर हम सभी भारतीय नागरिक को इस पर प्राथमिकता से सोचना चाहिए और इसे अमल में लेना चाहिए।
इस सूक्षम त्रुटि के भयंकर परिणाम हैं संविधान की सपथ खाने वाले अक्सर किसी ना किसी गैरसंवैधानिक कार्यों में संलिप्त पाए जाते है दरसअल उनने ना तो काभी संविधान पढ़ा होता है ना सुना।
पढ़े लिखे आईएएस और पीसीएस ’नेता जी’ के हर कदम पर संविधान को साधाते जाते हैं क्योंकि वो जनता द्वारा चुन के आए हैं और वो चयन परीक्षा के द्वारा। अब यहां एक नई समस्या आ गई की चयन परीक्षा से चुन कर आए और चुनाव से चुन कर आए अभ्यर्थी में कोन श्रेष्ठ ? ये एक व्यावहारिक प्रश्न है जो चीख रहा है लोकतन्त्र के सामने हर रोज पर कोई सुनवाई नहीं। ये बेबसी है लोकतंत्र की या उसके रखवालों का जाहिलपन ?
क्या ये लोकतन्त्र के दोष मान कर हम हाथ पर हाथ रख बैठ रहें या आगे बढ़ कर इस समस्या का समाधान  निकाला जाए। मुझे लगत है हर समस्या का समाधान है और उसे हल किया जाना चाहिए। 
मेरा सभी आईएएस और पीसीएस एवं अन्य सरकारी या निजी क्षेत्र से जुड़े सभी लोग जो भारत निर्माण में सहयोग दे रहे हैं का आह्वान करता हूं कि एक स्वानिश्चित अवधि सेवा के बाद राजनीत में आवश्य एक पारी खेले और एक स्वस्थ एवं समर्थ्य सदन निर्माण के कार्य में योगदान दें। समाज को एक नई दिश एवं सोच देने की जरूरत है। अशा हैं आप सभी अपने और अपनों के उज्जवल-धवल भविष्य के लिए आवश्य कदम बढ़ाएंगे। धन्यवाद।
✍️श्री निवास द्विवेदी।

पापड़

आपने जितने पापड़ अब तक बेलें हैं,
हमनें उणमें से एक अभी तक न देखें हैं।
आपकी तो उमर है कुछ कर कमाने की,
हमारी तो अभी शुरवात है बनने की बनाने की।
आप का दौर है अभी नहीं तो कभी नहीं,
हमारा अभी नहीं तो फिर कभी।
बुढ़ापा थोड़ी है जवानी है, दीवानी है!
वो जो प्यास है आज की, उसे बुझानी है।
कल का सोचेंगे वो दौर भी आएगा। 
आज फिर लौट कर नहीं आएगा।
अभी कर लूं गलतियां संभल जाऊंगा,
कल मैं भी आप बन जाऊंगा।
जहां दुकानें कम जंजाल ज्यादा,
रिश्ते कम बवाल ज्यादा।
उत्तर कम सवाल ज्यादा,
प्यार कम देखभाल ज्यादा।
बेरोजगार फिर भी कहेगें समय नहीं है ज्यादा,
करेंगें आधा चाहेगें ज्यादा।
पेंशन कम टेंशन ज्यादा,
जिंदगी कम मौत ज्यादा। श्री ✍️।