अनजान राहों में (गीत)

नमस्कार! 
दोस्तों आज यूथनज़र में "अनजान राहों में"  पर क्या हो सकता है उस कल्पना पर एक गीत..पढ़िए और आनंद लीजिये..| 



अनजान राहों में भी अपने मिल जाते हैं


मिलके संग दिल के गीत गुनगुनाते हैं


इक दूजे के करीब आजाते हैं


नयनों की बगिया में खो जाते हैं


बगिया की खुशबू में, भौरों की मटरगस्ती में


घटाओं के मन मचले, फिजाओं के अरमान खिले


बसंत करे श्रृंगार, फिर बरखा करे विस्तार


नयन नगर में ख़ुशी अपार,


कलियों के हुए सपने साकार


झूम के पेड़ इक दूजे के गले मिल जाते हैं..|1|


{दो राहें मिली एक मंजिल बनी,


सफ़र बन गया हनी-हनी.


 जिसके पीछे पड़ गया मनी-मनी,


हो गयी लाइफ फनी-फनी.}tiger


ये देखो तारे सितारे, देखो सजे हैं कैसे प्यारे


मानों मणियों की बिछी हो चादर


या खुदा ने उडेला हो करिश्मा-ए-गागर


वो खुदा तू मणियों की तारों की


करिश्माई सूरत दे दे


अनजान मुशाफिरों को रिश्तों की मूरत दे दे


गर तू चाहे तो सागर गागर में भर जाते हैं..|2|


हम दोनों के खास अंदाज जीने के


घटायें छलका रही जाम आजा


फिजायें बजा रही हैं बाजा


हवाएं गुनगुनाएं, मधुर राग सुनाएं


पंछी पिजड़े में मुस्काते,


और राग मिलन के गाते हैं..अंजन राहोंमें..|3|


{ऊँचें नीचे आगे-पीछे होते चले


इक दूजे की बांह खींचे चले }tiger


ऐसे तो बन गयी अपनी बात,


मिल गयी प्यार भरी सौगात.


जिन्दगी की रहें हो गयी चव्वन


मिल कर गले प्यार के गीत गायें हुमन


Hello sweet-how we meet


Hello dear! How fair


Do you know, I see you


No its god make virtue.


आओ सुनें सुनाएं, झिझक को सुलाए


पर्वतों से आते दरियाओं के नाते


दो झरने संगम बन जाते हैं..अनजान राहों...|4|

               श्री निवास द्विवेदी यू
 



  







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