आओ मिल के करें सृजन-गीत

नस्कार!

मैं आपका दोस्त श्रीनिवास द्विवेदी लेके हाजिर हूँ आपका अपना प्रोग्राम "काव्यगंगा"

                    1

आओ मिल के करें सृजन, यारों अपना नया चमन.

जहाँ सब को मिले अधिकार, कोई किसी से न करे प्रीतिकार.

सब को सभी में विश्वास, ऐसी जगाओ जीवन ज्योति की आश.

बुझता दीपक फिर जले, बच्चा-बच्चा गले मिले.

मुश्किलों को कर दे आसन,यह है ‘मानव’ युग की फरमान...आओ

 मिल के करें सृजन, यारों अपना नया चमन.                                            2     

बजे शहनाई और हो धूम,चारो तरफ हो मानव तेरी बूम. 

धरती का कण-कण प्यासा,तेरी लहू की है आशा.

लिख दे शांति की नई इबारत,फिर न हो किसी क्रांति की चाहत.

आओ करो प्रितिज्ञा नित जीवन ज्योति जलाओगे.

बन युग प्रवर्तक कर्ममशाल दुनिया को दिखाओगे.”

मुश्किलों को कर दे आसन,यह है ‘मानव’ युग की फरमान...

आओ मिल के करें सृजन,यारों अपना नया चमन.                                        3

धरती को पहना दे धानी चुनरिया,और अम्बर को नीली घांघरिया.

श्वेत रंग का पहन कर सिलवट,जीवन रंग का बदल दे करवट.

आतंक-माओ-अलगावाद,मिटा दे चमन के सभी विवाद.

उठ जा प्यारे करके सिंहनाद.जीवन संग्राम का बजा के तू शंखनाद,

मुश्किलों को कर दे आसन,यह है ‘मानव’ युग की फरमान...आओ 

मिल के करें सृजन, यारों अपना नया चमन.                      

                           4     

जीवन के स्रोत सभी जगायेंगे,नित नव जीवन पुष्प उगायेंगे.     नहीं कमी कोई रह जाएगी,उन्मुक्त चमन सृष्टि स्वयं बनाएगी.

करता जा मानव करत न्यारे,कर्म सुखों के धाम है प्यारे.     फिर ऐसी नींद में तू सोयेगा,जिससे जगाना हो नामुमकिन.     

और हर लफ्ज में सुन-सुन की,बजेगी धुन त-त-धिन.      मुश्किलों को कर दे आसन,यह है ‘मानव’ युग की फरमान...        आओ मिल के करें सृजन,यारों अपना नया चमन.

नोट-मेरी अभिलाषा थी की यह गीत"सत्याग्रह" फिल्म में शामिल हो.







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