कहर कार्बन-नाइट्रोजन का

नमस्कार!
मैं आपका होस्ट और दोस्त श्री लेके हाजिर हूँ प्रोग्राम
यू जिसमे आज हम चर्चा करेंगे शहर के हवा के बारे में...'कहर कार्बन-नाइट्रोजन का'

 

अपने शहर की हवा ख़राब होने से बचाएं. अपना और अपनों का कल बचायें.जिस कदर पूरे शहर को धुंध ने अपने अघोष में कर लिया था उससे तो यही लगता है, की आने वाले दिनों में ये कहीं शहर में रहने वालों को ही अपना निवाला न बना ले| अगर इसका समय रहते सरकार और जनता के द्वारा प्रतिरोध न किया गया तो स्थिति की भयावहता की कल्पना कर पाना भी मुश्किल होगा| जी हाँ आपने देखा किस तरह से राजधानी दिल्ली और लखनऊ की सडकें धुंध से कम दृश्यता का शिकार हुईं. बात सिर्फ इन्ही दो शहरों की नही हैं| देश के सभी मेट्रो शहरों की हवा बीमार है| इनमे दिल्ली और लखनऊ सबसे ज्यादा बीमार शहर है| नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एन.जी.टी.) ने इन दो राज्यों के साथ ही राजस्थान,हरियाणा व पंजाब को प्रदूषण नियंत्रक उपाय लागू करने के आदेश दिए हैं| ये सब इस लिए हो रहा है क्योकि -समाज को मूलभूत आवश्यक वस्तु का दोहन करते आना आम बात है. मानव अपनी मूलभूत आवश्यकता के खातिर भू, जल, वन, वायु, तथा उर्जा का उपभोग करता है. और वह स्वयं को विकास के नित-नव शिखर की ओर अग्रसर रखना चाहता है. अधिकाधिक उपयोग, अंधाधुंध विलासिता को आज की शान बना कर रख दिया है. स्वार्थान्ध जग अपने हित के लिए कार्य कर रहा है वह चाहे जैसा भी हो, उचित या अनुचित. जीवन के स्रोतों की परवाह किये बगैर. परन्तु स्रोतों को सभी मेहमानों की खातिर दारी करनी है, अत्यंत उपभोगियों को सीमित स्रोत कब तक परोसते रहेंगे...भला कब तक ? 

अब जब हवा ख़राब हो ही गयी तो सी.पी.सी.बी की भी नींद टूटी| और एक निर्देश जारी करते हुए अब सभी शहरों को हर हफ्ते प्रदूषण आकड़े जुटाने को कहा गया है. अगर इससे निपटने की बात की जाए तो इन मुद्दों पर गौर करना होगा- 1-सार्वजानिक परिवाहन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाये.


2-ट्रैफिक नियमों को सुधारा जाये.

3-सड़कों को अतिक्रमण मुक्त किया जाये.

4-जनजागरूकता कार्यक्रम किया जाये.

5-प्रेशर हार्न निकलवाए जाएँ.

6-पार्किंग शुल्क बढाया जाये ताकि लोग निजी वाहनों का कम से कम प्रयोग करें.

7-बैटरी चालित वाहनों को प्रोतसाहन/अनिवार्य करना.

8-पैदल चलने वालों के लिए फुटपात सुरक्षित किये जाएँ.

ये सब एहतियात ऐसे हैं जो कार्बन-नाइट्रोजन के कहर से उबार सकते हैं. अपने बच्चों को सांस लेने के लिए, जल एवं ईंधन के लिए पौधों को लगाकर आप अपने सम्पूर्ण दायित्यों का निर्वहन कर सकते हैं. समय गुजर न जाये जरा जल्दी कीजिये. आप-धापी में जिंदगी की धारा कहीं भी गुल हो सकती है. अपने प्रतेक संतान के लिए एक पर्याप्त है.परन्तु सभी करें.
श्री निवास द्विवेदी यू   

रिश्वत (कव्वाली)

नमस्कार !
 मैं आप का होस्ट और दोस्त लेके हाजिर हूँ आपका अपना प्रोग्राम|
यू जिसमे आज हाजिर है एक कव्वाली..
रिश्वत  (कव्वाली)
(कोरस-हाय-2 ये रिश्वत..लूटता है ईमान का अस्मत....हाय-हाय....)
“नश्तो-नाबूद कर देता रिश्वत ईमान का कदम,
“घुटने टेक देते हैं फलसफे मेहरबां होकर बेदम.
रिश्वत बादल है तिजारत का बाँकुरों जरा सुनो,
जला दे इसे पेट की आग सेब वो सूरज बनो.”
रिश्वत रिश्वत हाय-हाय रिश्वत,
अब बन गई है देश के बांकुरों की किस्मत.
रिश्वत का नया रूप चौकीदार,
बैठता है जो हम-दर्दे-दरबार.
रखता है जो रहमो-करम का दस्ता,
चाहिए शोहरत तो भर दो इसका बस्ता.
कारीगर है अफ़सानो का,
क़द्र करता है रिश्वाते-मेहरबानो का .
अर्श से फर्श तक करता है मरम्मत...रिश्वत/1/
ये जंग है लड़ाई है, उम्मीद की अंगड़ाई है.
कोई ये न सोचे ये मामूली लड़ाई है.
इसमें तो सब दाँव पर है लगा
जिस्म भी, जमीर भी बाकि कुछ है बचा
काट दो साँस की डोर बेमुरव्वत...रिश्वत/2/
भेंड़ चाल वालो, अपने लिए मरने वालो.       
जिल्लत में मरते हैं सभी,
मरकर भी जिओ ऐसा सोचा है कभी.
रिश्वत के दीमक से बचो,
अब न अपने लिए जाल रचो.
मिटा दो उस दरख्त को जिससे यह उगता है,
बाकी बचे न इसके बाजुओ में कुव्वत...रिश्वत/3/
रिश्वत है वो जहर, पीकर जिसको उठती है लहर
ईमान पर बरसता है कहर, डूबता है सारा शहर.
आज जानते हो कौन है अव्वल,
रिश्वत देने में जो है मुक्कमल.
नादारदो की है ये किस्मत,
जिद्दो-जहद की उड़ाती है अस्मत.      
भ्रष्टाचार है इसका बाप,
ताले-किस्मत पर बैठा है जो बनकर साँप.
देख कर जिसे मासूमों के हांड जाते है काँप,
रोजगार के ‘हार’ पहनने के खातिर रिश्वत देने जैसा करते है पाप.
ऐ बेरहमो भारत के गौरव के न कौरव बनो,
ना-पाक इरादों की न फरियाद सुनो.
चेत जाओ अपने आदर्शो के बाबत...रिश्वत/4/
खा लो कसम की बनकर अफसरान,
रिश्वत की मरोड़ दोगे हलकान.
आज पूरी हुयी ‘किशन’ की हसरत
दलदले रिश्वत से मिल गयी फ़ुरसत. 
अब आवाज़ आएगी करो कुव्वत करो कुव्वत
कि खुदा को प्यरी हो चुकी है वेश्या-ए-रिश्वत/5/


श्री निवास द्विवेदी यू