दोहन

नमस्कार !

मैं आपका होस्ट और दोस्त श्रीनिवास द्विवेदी 'श्री' लेकर हाजिर  हूँ प्रोग्राम  "विचारशाला"...आज हम बात करेंगे प्राकृतिक स्रोतोंके हो रहे 'दोहन' की जिसकी वजह से दिल्ली लखनऊ और देश के तमाम शहरों की की हवा ख़राब हो गयी है...

समाज को मूलभूत आवश्यक वस्तु का दोहन करते आना आम बात है. मानव अपनी मूलभूत आवश्यकता के खातिर भू, जल, वन, वायु, तथा उर्जा का उपभोग करता है. और वह स्वयं को विकास के नित-नव शिखर की ओर अग्रसर रखना चाहता है. अधिकाधिक उपयोग, अंधाधुंध विलासिता को आज की शान बना कर रख दिया है. स्वार्थान्ध जग अपने हित के लिए कार्य कर रहा है वह चाहे जैसा भी हो, उचित या अनुचित. जीवन के स्रोतों की परवाह किये बगैर. परन्तु स्रोतों को सभी मेहमानों(हम मनुष्यों की) की खातिर दारी करनी है, अत्यंत उपभोगियों को सीमित स्रोत कब तक परोसते रहेंगे...भला कब तक ?
उपयोगी दिन-रात उत्पन्न होते जा रहे रहे हैं किन्तु स्रोत दिन-बा-दिन बूढ़े होते जा रहे हैं. उनके बूढ़े होने तक ठीक था लेकिन उनकी संतति नहीं चिंतन की बात तो यह है..?
अतः सभी लोग प्रतिदिन उपयोग करने के  कारण इनके परिवार हुए तथा यह जीवन-पुष्प खिलाकर वह हमारे जनक तुल्य हुए क्योकि यह पोषक का कार्य करते हैं. अतः हमें इन स्रोतों को  सभी प्रकार जीवित रखते हुए नव स्रोतों के विकास के लिए प्रकृति को स्वछन्द गति से चलने देना चाहिए.
जल, वायु तथा उर्जा इन सभी के एक मात्र जनक वृक्ष हैं. अतः वृक्ष के विकास पर ध्यान केन्द्रित करना आवश्यक है. वृक्ष को माली सींचता है परन्तु वृक्ष सभी जिव-धारियों की प्यास बुझता है, भूख मिटाता है, वायु प्रदान करता है तथा ईंधन के रूप में उर्जा देता है.
बुद्धजीवियों में श्रेष्ठ होने के कार हे मानव ! उठो, अपने समस्त जीवधारियों के लिए मूलभूत आवश्यक वस्तुओं का विकास करो. आखिर शुरवात कैसे हो..? जी हाँ प्रारम्भ...सर्वप्रथम वृक्ष के पौधों को तैयार करें फिर रोपण करें. माता-पिता अपने संतान को सुखी रखने के लिए धन इकठ्ठा करते हैं उनको शिक्षित कर रोजगार दिलाते हैं. उनके लिए ऊँचे-ऊँचे भवन बनवाते हैं. परन्तु क्या यह पर्याप्त है..? वायु, जल और उर्जा के बिना वह विलासी एक भी पल जी पायेगा.. नही न. इसीलिये, उसके स्वास्थ्य एवं समृद्ध जीवन की कामना करो और वह कामना है- पौधे लगाना.
अपने बच्चों को सांस लेने के लिए, जल एवं ईंधन के लिए पौधों को लगाकर आप अपने सम्पूर्ण दायित्यों का निर्वहन करेगें. समय गुजर न जाये जरा जल्दी कीजिये. आप-धापी में जिंदगी की धारा कहीं भी गुल हो सकती है. अपने प्रत्येक संतान के लिए एक पर्याप्त है.परन्तु सभी करें.  
और ऐसा करने से हमारे शहर की हवा ख़राब नही होगी और हम चैन की सांस ले पाएंगे और अपना एवं अपनों का ख्याल रख पायेंगें.

 

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