नमस्कार !
मैं आपका अपना होस्ट और दोस्त श्री निवास द्विवेदी लेके हाजिर हूँ प्रोग्राम "विचारशाला"| आज हम बात करेंगे 500 और 1000 रूपये के नोट के बारे में जो अब मात्र 'नोट' बनकर रह गए हैं.
मैं आपका अपना होस्ट और दोस्त श्री निवास द्विवेदी लेके हाजिर हूँ प्रोग्राम "विचारशाला"| आज हम बात करेंगे 500 और 1000 रूपये के नोट के बारे में जो अब मात्र 'नोट' बनकर रह गए हैं.
"नोट पांच सौ के हजार के, अब लगते हैं एक ‘नोट’. जी हाँ ये नोट जो भारतीय कैरेंसी के सबसे बड़े नोट थे अब सिर्फ एक ‘नोट’ मात्र रह गए हैं जिस पर लिखा हैं-24 नवम्बर तक सभी पुराने 500 और 1000 के नोट बंद हो जायेंगे."
ये फैसला है बहुप्रतिक्षित मोदी सरकार का जो लोगों ने
सहर्ष कुबूल किया. लोग बैंकों में घंटों
खड़े होकर बैंकिंग कार्यवाही को अंजाम दे मोदी सरकार के फैसले को सपोर्ट कर रहे हैं.
सरकार द्वारा ‘काले-धन’ के खिलाफ यह अब
तक का सबसे बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक रहा है. इस लिए नही की कला धन पकड़ा जयेगा. बल्कि
इसलिए की इसमें हर नागरिक घर-बार से बहार निकल कर बैंक,डाकघर व एटीएम का चक्कर काट
रहा हैं. कहीं कोई धक्का-मुक्की कर रहा है तो कोई अपनी पॉवर दिखा रह है. उन्ही
लाइनों में ओ मा/बाप भी खड़े हैं जिनका लड़का आख़िरी सांसे गिन रहा है. कुर्सियों की
चक्कर काट रही एक माँ भी दौड़ रही है जिसके बेटी के हाथ में मेहँदी लगने वाले हैं. कुछ युवा भी
दौड़ते नजर आ रहें हैं जिनको एक मुश्त भारी कैश की जरुरत है अपने बीजा के लिए.और
रोजमर्रा की खर्च वाले तो खड़े हैं एक के ऊपर एक.
बाजार लोगों के हाथ में मन-माने पैसे न होने और पुराने
नोट बंद होने से मंदी का शिकार हुई है.
ऐसा क्यों ?
1-सबसे अधिक जन आकांक्षाओं वाली सरकार
को क्या कोई फैसला आनन-फानन में लेना चाहिये..?
जी बिलकुल नही. देश मोदी सरकार को चाहता है. मगर अपने जिगर के टुकड़े को सरकार के किसी जल्दबाजी के फैसले का शिकार नही होने
देना चाहता है. कोई मां अपने बेटी की मेहँदी की रश्म नही रोकना चाहती. कोई युवा
अपने रोजगार व शिक्षा में रुकावट नहीं चाहता. बाजार सरकार से मांग की अपेक्षा रखती
है मंदी की नही. सरकार को ये कदम
उठाने से पहले इसके नकारात्मक पहलुयों की कम से कम संख्या को सुनिश्चित करना था.
सरकार ने अपने अजेंडे में कालेधन को जोर-शोर से
उठाया.पिछले जून से सितम्बर तक कालेधन की घोषणा करने की एक सशर्त अभियान चलाया.
उससे पहले सरकार ने पी.एम.जेड.वाई के अंतर्गत लोगों को बैंकों से जोड़ा.
अब सवाल ये है-
2-जब सरकार की भविष्य की योजना ऐसी कुछ
थी तो पी.एम.जेड.वाई में एटीएम अनिवार्य क्यों नही किया गया ?.
हर कस्बे में एटीएम बिठाना था. और कैश लेश खरीदारी को
प्रोत्साहित कर देना था. जिससे लोगों को सहूलियत होती. पर आज क्या है? जो हैं वो
तक ढंग से काम नही कर रहे. कुछ जो कर रहे हैं वहां घंटो लाइनें लगाओ वो भी निश्चित
नही कब तक. और फण्ड ख़त्म हुआ तो सब बेकार.
ग्रामीण परिवार बहुत डरा हुवा है. वहाँ तो लोगों का
मनना है की मोदी उनका पैसा ले लेगा. किसान रबी-फसल की बुवाई के लिए भटक रहा है.
आंचलिक बैंकों की भीड़ की कल्पना भी नही कर सकती मोदी सरकार.
पालिसी क्या बनाई..पुराने नोट बंद. तो अब सवाल है की-
3-नए नोट मार्केट में क्यों नही उतारे
?
सरकार ने नए नोट
मार्किट में नही उतारे और लोगो को कह दिया की आपके नोट अब बेकार हैं. ये कौन सी
जनहित की नीति है.
कैरेंसी उतारी वो भी 2000 की पहाड़ जैसी नोट जिसको
20 सौ के और 50 के 40 नोट चाहिये तोड़ने के लिए. 500 की नोट उतारा ही नही मार्केट
में. जो जन उपयोगी सिद्ध होता.
4-सभी दूकानदारों के लिए समस्या अब क्या
करें ? उन्होंने सीधा बोल दिया ये नोट(2000) नकली है.
ये समस्या किसकी बनी आम जान की.
अगर उताराना था तो पहले छोटी नोट उतारते मार्केट में.
नए नोट बनाये ओ
भी पुराने नोटों की तुलना में बड़े जिससे पुराने एटीएम सीडी से नहीं निकला जा सकता.
एटीएम 9,10 नवम्बर को बन्द रहा फिर भी इस समस्या को हल नही किया गया.
देश के लगभग कुछ एटीएम से ही पैसे निकल पा रहर हैं अभी
भी. बाकि के एटीएम सिर्फ “और चुनो मोदी” (atm) को जैसे कोटेशन लग रहा है.
5-कौन है इसका जिम्मेदार ?
जिम्मेदारों
की चूक है, कहीं न कहीं ये मोदी सरकार का अतिउत्साह है.
६-एटीएम से पैसे निकलने की लिमिट क्यों
तय करनी पड़ी ?
इसलिए की देश की जनता की मांग छोटे नोटों से नही पूरी
की जा सकती. इसका मतलब यह सरकार को पता था. और निर्णय जल्दबाजी में थोपा गया. शायद
मोदी की धमक में आर.बी.आई. झुक गया. और सारे देश को बैंक,डाकघर और एटीएम के सामने
लाकर खड़ा कर दिया. और हर तरफ हर जुबान से यही चीख आ रही है-
“बूढा बच्चा और नौजवान,
मोदी तुझे गए पहचान”
श्री निवास
द्विवेदी “यूथ नजर”
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें