बेपरवाह

आज देखा मैंने उससे पैदल चलते हुए,
तपती दोपहरी में आगे बढ़ते हुए।
वह मस्त थी अपने चाल में,
कोई फिक्र नहीं लोग आ जा रहे हैं टैक्सी में।

पर वह तनिक भी संकोच में नहीं,
जैसे टैक्सी में लोग मस्त सवारी का आनंद ले रहे हैं वैसे वह भी मचलते हुए सड़क का आनंद ले रही है।

न थकान है, न सिकन है।
बेपरवाह फुटपाथ पर बढ़ रही है,
लेकिन एक चीज मुझे समझ में नहीं आई।
क्यों लड़की पैदल चल रही है ?

दौड़ती-भागती ट्रैफिक में क्या उसको जरा सा भी नहीं लगा कि उसे भी सवारी करनी चाहिए, उसको भी ऑटो में बैठ कर चलना चाहिए।
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

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