यूपी चुनाव 2017

नमस्कार..!
आपक अपना होस्ट और दोस्त "श्री" लेके हाज़िर है  प्रोग्राम 'नव बन्ध' चुनावी एजेंडा 2017



चुनाव के पहलुओं पर नुक्ता चीनी की कोशिश...क्या है आज के चुनाव का एजेंडा..?

·     नुक्कड़ होटेल जिसने किया फ्री होगा
चुनाव में उसके पीछे जनसमूह होगा.
·     सोमरस की नदियाँ जो बहायेगा
सेहरा उसी के सर पर आयेगा.
·     बनारस के फेर में मत रहना यूपी बहुत भरी है
करनी अभी बहुत तैयारी है.
·     यूपी वही जहाँ जौनपुर,आजमगढ़ है
बुंदेलखंड,संतकबीरनगर और हरदोई है.
     रख कर दीन ध्यान में उड़ाना तुमको सुखोई है.
·     अयोध्या से भी गुजरना है मथुरा काशी से भी
देवा और किछौछा से भी.
पटरी पर बैठने वालों से भी मिलना है और
पटरी पर चलने वालों से भी.
·     किसी को नकद की दरकार तो किसी को नारायण की
इन सब से गुजर रहे होओगे तो दिखेगी जमात किसानो की
एक अदद से दरकार है जिनको कृषि में चमत्कार की
·     कहीं युवाक्रोश मिलेगी तो कहीं स्त्री उत्पीडन,
अस्मिता तो कहीं दिखेगी तरुनाई करते चूल्हा चक्की
·     ये सब है निगेटिव, बनानी है जिनकी तस्वीर पाजिटिव.
26/10/16

दिवाली

नमस्कार !
आपका अपना होस्ट और दोस्त "श्री " लेकर हाजिर है प्रोग्राम 'नव बन्ध'...दिवाली का खूबसूरत तोफा कुबूल हो ..!

§   आई-आई देखो आई दिवाली

  मिठाई की छौक, पाटकों की भौंक गली-गली.
  §   पटाके कुछ रावण की हँसी के जैसे है फटते
तो कुछ विमला की मुसकान की तरह फुस्स-फुसाते.
  §   मिठाइयाँ ! तो आज बन ठन कर हैं बैठी
कुछ तो हैं असली पर कुछ हैं नकली.
  §   ड्रैगन झालर लाइटों का टोटका टूटा
बैरी का हाथ पकड़ने से देशवासियों का गुस्सा फूटा.
  §   अखिलेश चाह रहे दिवाली लाइट से करना दिलाईट
कान खींच कर, कर दिया है इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट को राइट.
  §   लेकिन मोम-मुलायम को पिघलना होगा
रख अतीत को ध्यान में भविष्य बनाना होगा.
अखिल-शिव करें या शिव-अखिल
पर चलनी चाहिए सायकिल.
  §   सीमा पर गोली रोज मनाती है दिवाली
 दशकों बीत गए पर न आई उजयाली.
  §   हर साल मनाते है दिवाली
घी के दीपक, तेल के दीपक कोई सजाये मोमबत्ती की थाली
       किसी के दीपक में नहीं देखा जाति,धर्म,संप्रदाय और ऊच-नीच का बाती
   नहीं दिखा आतंक,माओ,अलगावाद की मिट्टी का बना दीपक
   नहीं दिखा हिंसा,प्रतिकार,प्रतिशोध की माचिस
   नहीं दिखा किसी के दीपक में बुरी सोच और बुराई का तेल
   हर साल मनाते हैं दिवाली,
 समाज के दीमक इन कीट पतंगों को खत्म कर पाया नही.
  §               हर साल मनाते हैं दिवाली
फिर भी कसाब,दाउद,हेडली, पा-चीन
       सम कीट आ गिरते हैं मेरी थाली.
   लगता हैं मुझको अपने घर की दीवारों ऊंची करने होगी
   मेरी नजरों से बच निकलते हैं
 ड्रोन से निगरानी करनी होगी.
  §   मुझको अब छोटे-छोटे न कर एक बड़ा
एक बड़ा दीपक जलना होगा
जलकर राख जिसमे इन सब को होना होगा
बाँट कर मिठाई फिर सबको देनी होगी बधाई
आई-आई भैया देखो आई दिवाली.
·    टाटा’ गर करनी है सेलिब्रेट दिवाली
तो ढूढना होगा दीपक इनोसेंट इस दिवाली.
·    ‘ऐ दिल है मुश्किल’ और शिवाय
 देखो कैसे पिटती है इस दिवाली.
·    देखना है नवम्बर में सलमान किसको बनाते है साली
 किसको गिफ्ट भेज कर करते है सेलिब्रेट दिवाली.
·    तलाक-तलाक-तलाक
 अबकी बार तलाक-तलाक-तलाक की है किसकी बारी
 (देखना है यूपी बोलती है किसको)-
 बसपा ,कांग्रेस,भाजपा का या सपा की है बारी.
·    दिवाली में मीठा जिसका लडडू होगा,आगामी चुनाव में ऊचा उसका तम्बू होगा.26/10/16

 

 

न देखूं तो तुझको

नमस्कार!

आपका अपना होस्ट और दोस्त'श्री' लेके हाजिर है दिल के तार को छेड़ने वाले कुछ "शेर"



शेर-1.देख के तुझको दिल में गुदगुदी सी होती है
    न देखूं तो तुझको घुटन सी होती है.

2.इक था पागल दीवाना भौरा,
भौरा थक गया डाल-डाल के फेरा, लेकिन फिर भी कलियों ने सपने में भी नही दिखाया चेहरा.  

3.यूं ही तेरी याद आई और हम खो गये/
 खुशबू भरी हवाओं के झोकों में सो गये/
 सपने में प्यारी वह कली खिल गयी/
 जिसको ढूंढते-ढूंढते आँख मेरी खुल गयी/ 

4.भला क्यों ‘श्री’ अपना कल बेमौत दफनाता हैं
 कर्ज-फर्ज का फंदा डाल गले उफनता हैं/

5.क्या आसमान से बरसने लगे जलजले
 कहाँ गुम हो गए वरदान-ए-जीवन के बुलबुले/

6.या खुदा वो दिन कब आयेगा
 की मेरी नींद में तू आयेगा/ 

7.इतना भी कोई मजबूर न हो
 की तन्हाई सुनने का कोई हजूर न हो/

8.जब बात हो सरहदों कि तो मन का खौफ भी ताकत बन जाता है,

ये आसमा के तारों


नमस्कार..!
आपका होस्ट और दोस्त 'श्री' लेके हाजिर है प्रोग्राम "'नव गीत'" ...

ये आसमा के तारों-सितारों बता दो मेरी धड़कन धक्..धक् धडकती है क्यों..?
परियों पर दिल मेरा मचलता है क्यों..?

इन हवाओं में मन मेरा थिरकता है क्यों..?

फिजवो में उछलता है क्यों..?

न जाने क्यों..ये आसमा के ......./1/



क्यों मुझको जो दीखता है, वो होता नही...

खोजता हूँ वो पर मिलता नही,जाता हूँ मगर न पता कहीं

हर शख्स गीत गाये वो गीत बन जाता कहीं..


दिल मेरा मिल जाता कहीं,कभी कुछ मुझे रास आता नही न जाने क्यों...ये आसमा के.../2


काश मैं भी वो सौगात पाता, प्यार भरे गीत गाता

परियों पे न दिल मचलता और न ही निकम्मा धड़कता

बन कर बाबू घूमता माउन्टआबू

साथ में होती उसकी खुशबू..क्यों ..?

ऐसा होता नही न जाने क्यों...ये आसमा के.../3/