नस्कार!
मैं श्री निवास द्विवेदी आपका अपना होस्ट और दोस्त लेके हाजिर हूँ "आज: युवा और प्रौढ का अगला अंक.....
“कार्य-महत्व देने के लिए उसे कठिन बनाओ.” क्योकि-
सरलता महत्वहीनता का शिकार हो जाती है.
मैं श्री निवास द्विवेदी आपका अपना होस्ट और दोस्त लेके हाजिर हूँ "आज: युवा और प्रौढ का अगला अंक.....
माना प्रौढ़ वर्ग जोश के शिखर पर नही होता है क्योकि वह अपने आयु के साथ-साथ
अपनी शक्ती खर्चता जो जाता है परन्तु वह इतना कमजोर कैसे हो जाता है कि अपने जीवन
के स्वर्णकाल- युवापन को इसलिए वह बकवास करार देता है-क्योकि वह युवा नही रहा ?
क्या युवा के शक्ति का माप किया जा सकता है ? नही न. प्रौढ़ जहाँ अनुभवों का साकार
रूप होते है युवा वहीं कर्यों की प्रतिमूर्ति. असंभव को संभव करना युवा शक्ति का
खेल है. अगर उसे दिग्दर्शन कर कार्य कराया जाय तो वह कार्य को सफलतम रूप देता है
किन्तु यह युवा अपने भविष्य को देर से देखना नही चाहता अतः वह प्रौढ़ वर्ग के
निर्देश लेना पसंद नही करता पर जब दोनों में समन्वय बन जाता है तो फिर हीरे से भी
ज्यादा चमकीला व निगलने वाले के लिए जहर से भी बढ़ कर होता है.
अक्सर निराशा को सीने से लगा चुके लोग आशा का बांह थामे युवाओं को पागल समझ
बैठते है और उन्हें रस्ते दिखाने लगते है. लेकिन जरा सोचिये क्या यह सत्य है- अगर
आप सीढी नही चढ़ सके तो आपका सम्बन्धी भी नही चढ़ सकता ?
आप अपने अनुभवों को उसे आगे बढ़ने के लिए दें न की पीछे हटने के लिए दिमागी पर्वत बनाये. जितना आप किसी को ये न करो इसमें ये है वो है, यह ऐसा है कहने में उर्जा खर्च करते है और समाज में एक नया सफल चेहरा नहीं विकसित होने देते हैं. यही अगर आप चाहें तो तमाम उन समस्याओं के साथ कर सकते हैं जिनके चलते आप अपने दिलकशी को न अपना सके. आप अपना दिमाग जिस क्षेत्र में जिस विश्वास के आधार पर खर्च करोगें आपका व्यापार उसी विश्वास क्षेत्र में चमकेगा. अतः अपना माइंड-सेटअप करो और अपने पैरों में चुभने वाले सभी काँटों, कंकडों, और पत्थरों को रस्ते से नष्ट करने का बीड़ा उठाओ . वह मुश्किल जो मुझे हुई अपने दिल-अजीज को पाने के लिए, वह सामने वाले को न हो यह हमारा ध्येय होना चाहिए.
आप अपने अनुभवों को उसे आगे बढ़ने के लिए दें न की पीछे हटने के लिए दिमागी पर्वत बनाये. जितना आप किसी को ये न करो इसमें ये है वो है, यह ऐसा है कहने में उर्जा खर्च करते है और समाज में एक नया सफल चेहरा नहीं विकसित होने देते हैं. यही अगर आप चाहें तो तमाम उन समस्याओं के साथ कर सकते हैं जिनके चलते आप अपने दिलकशी को न अपना सके. आप अपना दिमाग जिस क्षेत्र में जिस विश्वास के आधार पर खर्च करोगें आपका व्यापार उसी विश्वास क्षेत्र में चमकेगा. अतः अपना माइंड-सेटअप करो और अपने पैरों में चुभने वाले सभी काँटों, कंकडों, और पत्थरों को रस्ते से नष्ट करने का बीड़ा उठाओ . वह मुश्किल जो मुझे हुई अपने दिल-अजीज को पाने के लिए, वह सामने वाले को न हो यह हमारा ध्येय होना चाहिए.
किसी का प्रौढ़ या युवा होना सफलता का प्रमाणपत्र नही बल्कि उसके प्रतिशत को
व्यक्त कर सकता है. किन्तु आंकड़े बनते ही हैं नवोन्मेष के लिए, पुनर्सृजन के लिए
अतः आंकड़ों पर विशेष ध्यान न देकर स्वयं के क्षमता को दक्षता में प्रदर्शित करें.
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