बेख़ौफ़ रहो खुदा के आशियाने में (गीत)



नस्कार!
आपका अपना होस्ट और दोस्त "श्री"लेके हाज़िर है प्रोग्राम "नवगीत" की अगली कड़ी..
बेख़ौफ़ रहो खुदा के आशियाने में रहमो करम से नवाजा उसने जान,
बेसब्र रहो जिन्दगी के रंग ज़माने में,छेड़ दो सुरमयी बसंत की तान,
जो सुने मधुर तान, होक मद मदमस्त छेड़े गान.
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कहर से हो फ़िजा आबाद, फिर न हो कोई घर बर्बाद.
हो खुशियों की होली, फिर बने रंगोली.
जश्न की दिवाली, मनें हर गली-गली.
चलो झूमें नाचे गायें, छेड़ें कोई मधुर तान.
जो सुने मधुर तान, होक मदमस्त छेड़े गान.
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आओ खुशियों से, खुदा से इबादत करें.
सभी फूले फलें यही चाहत करें.
शेर-खुदा ने ज़िन्दगी की जो सम्मा जगमगाया है,
  माँ ने बड़े प्यार से उसे दूध पिलाया है.
लुटाओ प्रेमके फूल, मिटाओ कलुष के शूल.
कसम खा आपस में न हो जुदाई,
ताकयामत रहे सलामत खुदाई.
छेड़ कोई मधुर तान, यह भारत है प्रेम की शान/..जो सुने
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तुम ईश्वर रूपी घड़े की बिखरी हुई बूँदे हो.
हे बुद्धीशाली विकास तुम आँख क्यों मूंदे हो.
जागो ऐ सृष्टा-प्रेय, सृष्टी के परम श्रेय.
श्रुति विदित संसार गीत हमारा,ग्रंथ इति प्यारा प्रकाश तुम्हरा.
ऋचाएं प्रेम सौहार्द की भावना,है विश्व वन्दित रचना.
यह भारत है प्रेम की शान, छेड़ कोई मधुर-तान/ जो सुने..

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