प्रीत की रीत

यह है दुनिया की रीत,
बंदे कोई नहीं करता तुझसे प्रीत।
सब है तेरे सुख के मीत रे बंदे,
कोई नहीं है करता तुझसे प्रीत।
तेरे सुखों के है भूखे, वह खाते हैं दाने रूखे सूखे। तेरी रसमलाई, में उनकी खुशी समाई।
तेरे भाग्य के मधुर गीत से है उनकी प्रीत।1।

तेरे कर्म प्रकाश, में छुपी है सब की जीवन आस, उजाले में जिसके देते हैं अपनी राहों को सांस। तेरी मंजिल को देख है इठलाते,
तू है मेरा अपना सगा सोच हर्षाते।
पर अग्नि परीक्षा देने से है कतराते।
तेरे हिस्से की कमाई के यह बनकर बैठे हैं खाई, अपनी बारी आएगी तो नजर ना आएगी परछाई। रे बंदे यह बेपेंदी के लोटे,
जहां देखा बिस्तर वही लेटे।
यह भूख की रीत है कोई नहीं करता तुझसे प्रीत,
यह दुनिया की रीत सब है तेरे सुखों के मीत।2।
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

मोड़

जिंदगी के हर मोड़ पर तू खुद को खड़ा करके देख ले,
ऐ हठी मानव तू हट के साए से परे देख ले।
चल कर भी नहीं मंजिल मिलती,
हौसलों को दिलों में है सजाते फिर से चलने के लिए अपने पंखों में ऊर्जा भरे हुए।
है जब वह चलकर गिरते,
फिर उठने की दिन रात है गिनते।
पल-पल की कठिन डगर में,
भावना के अंतर्मन में।
उठती है ज्वर विपुल आकांक्षी यह में।,
हवाएं तरंग संचार में हैं स्वर मिलाएं,
भावनाओं को दे रही हैं उज्जवल आशाएं।
यह नभ कह रहा है पुकार पुकार,
उठ मानव! मन मंदिर कर ले साकार।
तेरा है धरती का गोद सुनहरा,
वस तू पहन ले धरती लाल का सेहरा।
सूरज की अल्हड रोशनी तेरे रोम रोम में है भिनी। लेकर स्वर्ण शक्ति ध्वज फहरा दे जगह आंगन में, तो समझो मानव 'हठ' है सफलता तन में।
सुबह हो शाम हो दोपहर हो रात हो,
जय हो जय हो जय हो जय हो।
मुक्त स्वर में राग मालाएं गा रही हैं दिशाएं,  नभ में नृत्य करें सुर बालाएं।
तेरे हठी नुपुर करें मधुर झंकार,
उद्यम की बगिया में मीठी मीठी फफुहार।
भर रही गड्ढों और खांई को एक समान,
उगे हैं उर्मित कुमदल पुष्प वितान,
आ जाओ भौंरो तुम कर के अस्त्र संधान।
पकी फसल का करो सम्मान,
धरा देह पर बिखरे मोती मणियों को चुनो,
सुनहरे जीवन से भंडार भरो।
चमन में नव पहर बुनो। हट मंत्र का योगी अपना हट संभाल,
लौकिक कल्याण में अर्पण कर भाल।
युग सुखों का भंडार है तुझमें,
चराचर जगत का सार है तुझमें।
लेकर स्वर्ण शक्ति ध्वज फहरा दे जगह आंगन में, तो समझो मानव हदय सफलता तन में।
मानव तू चित्रकार है धरा को भांती भांति भवन सजाता,
आलीशान अंग्रेजों के चित्रहार है तेरे स्वरूप को बताता।
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

इतनी सी बात

बस इतनी सी बात है,
कि तू मेरे साथ है।
तो यह आसमा और यह सारा जहां मेरे साथ है। मेरे हाथों में जो तेरा हाथ है,
तो यह सारा जहां मेरे साथ है।
बस इतनी सी बात है,की तू मेरे...।1।

तेरी खुशबू है मेरी जुस्तजू,
तू ही है मेरे सुबहो-शाम की गुफ्तगू।

मेरा हर जर्रा तू है।
मेरे जिन्दगी के सारे रास्ते हर लम्हा,
पूछता है तेरा पता।
जिंदगी का हर सफर तुम पर टिकता है आकर, चलता हूं गिरता हूं फिर सम्हलता हूं बार-बार।

तुम जब जब मेरी आंखो से ओझल होती हो,
फिर से मिलने की आशा बनकर मुझमे रहती हो।

आज तकदीर का कौन सा पन्ना खुला है,
जहाँ देखता हूँ बर्बादी लिखा है।

तुम भी चले जाओगे, हम भी चले जायेंगें।
यह आशिक कँवारा ही मर जायेगा।

ऐ मेरी जिंदगी तू इस कदर मेरा इम्तहान न ले। शायद यही नियति हो मेरी।

मेरी कुछ भी नहीं हो तुम,
फिर भी बहुत कुछ हो तुम।
मेरे जिन्दगी की झूठ सच हो तुम,
अब मत पूछना की क्या हो तुम।

मैं खरीदूं वो साड़ी हो तुम,
औ मैं चलाऊं वो गाड़ी हो तुम।
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

महँगाई

महंगाई से हुआ बुरा हाल,
जीव जंतु सब है बेहाल।
शर्म-सरि सूखी, मर्यादा सोती है भूखी।
कठिन परिश्रम कर मिलती है सूखी रोटी,
गर घर में है 'बेटी'।
नहीं दिखते हैं अब वह आजानु बाहु हष्टपुष्ट, क्योंकि जननी के जन्म अधिकार छीन रहे हैं दुष्ट।
मर्यादा-सरि-सुता को निसंकोच रहे हैं मिटा,
जैसे आलू टिंडा प्याज टमाटर के मूल्य रहे हैं भूख मिटा।
देखो कैसे घूम रहा है चक्र काल,
महंगाई से हुआ बुरा हाल।1।

आभूषणों की पड़े हैं लाले,
चारित्रिक हो या सोने वाले,
महंगाई के आगोश में है यह रहने वाले।
क्या क्या हाल बताओ भैया,
क्या एक-एक बाल गिनाऊं भैया,
इशारों में समझो छाया निपट जाल भैया।
धरती पर अब नहीं दिखते जीवन वर पौधे,
ना जाने किस-किस भांति गए हैं रौंदे।
आज वंश है उनका काल मुख में,
लेकिन होगा हर्ष उनको कि मनुष्य आज है बाहर जर के मुख से।
कुछ जीव जंतु तो भूल गए कैसी है धरती,
शेष है जो महंगाई उनके इर्द-गिर्द है फिरती।
ऐसे फैला है विषाक्त जाल,
महंगाई से हुआ बुरा हाल।2।

महंगाई डायन बन कर बैठी,
मर्यादा को बतला रही है झूठी।
अपने उदर के तप्त ज्वाला में भर लेना चाहती है धरती,
प्राकृतिक उपहार जल को भी आगोश में है ले रही,
प्राण वायु पर भी अपना अधिकार जता रही है।
ईमान को ले डूबी है, और बच्ची ही क्या खूबी है, गर है बची तो रहने दो डायन ने सुन लिया तो गजब हो जाएगी,
और उसके संग मानव की भी सामत आएगी।
अब होगा उगाना महंगाई का काल,
महंगाई से हुआ बुरा हाल,
जीव जंतु सब है बेहाल।3।

अब क्या बताऊं मैं महंगाई का दंश झेल रहा हूं, जीवन संग्राम में बाजी खेल रहा हूं। रुपए की महंगाई आई है, डालर संग घूमने वह आई है।
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

बादल-सूरज

यह क्या बादलों ने अपनी गठरी ढीली कर दी,
जो धरती ने अपनी तिजोरी भर ली,
जीवन रत्न जल में क्या खिले कमल,
जो जीवन संगीत गाने लगे भंवरों के दल।
बादल के वरद-स्नेह है जल कण,
प्रिय अमृत को लालायित हैं रज कण,
वर्षा जल का रसास्वादन कर आई हरियाली,
हुआ लुप्त सफेदी जर। मुग्ध मेघ मधुर मल्हार, दिशा समेटे स्वर निनाद, धरा हरियाली वधू तैयार, गाए तीक्ष्ण विषाद।
उष्णता का दमन कर बादल हरियाली लाया,
सूर्य के तप्त नेत्र का भजन बन प्रिया को मुस्काया।
किंतु अधिक देर तक बात छुपी रही ना धरती से, बर्बरता से झांक रहा सूर्य अवसर के दरवाजे में। अपनी गठरी खाली देख बादल को जाना पड़ा भरने, अवसर का दरवाजा देख खुला सूर्य ने पैर पसारे।
वहीं खड़े वायु को बर्बर होने का मिला सहारा। धारा को वह स्पर्श करें इतने में आया बादल, किया जलास्त्र का संधान ठहर सका ना वह एक पल।
और सूर्य से बोला "मेरी नसों में पानी है बहता, सुन ले तू कोई और नहीं बादल है कहता, एक बार अगर मैं तुझ पर टूटा, फिर तो तेरा गर्वपिण्ड फूटा।
मेरा पराक्रम तूने देखा नहीं क्या,
जो अपनी मौत को बुला रहा।" गौर से सुनता मुस्कुराकर सूरज बोला "तू मुझ तक पहुंच नहीं सकता, मुझ पर टूटेगा कैसे, पराक्रम तेरा मुझे डिगा नहीं सकता, फिर मौत बनेगा तू कैसे।
गर तेरी नसों में जल, है तो मुझमें भी है अनल, पल भर में अस्तित्व सुनने कर सकता हूं,
तुझ में है क्या जो मैं झिझकता हूं,
कि तू मेरी ज्वाला से तप्त धरा को स्नेह देता है, जो मुझसे चाहकर भी नहीं होता है।
इसीलिए पुत्र तू पैदा होता है,
और अकड़ के आते ही मिट जाता है,
तेरा संसार मुझे बनाना आता है,
तभी तो धरती की स्निग्धता वश तुम्हे बनाता हूँ।" लेकिन गर्म किसको नहीं हुआ है,
मद में चूर बुद्धि से काम लेने वाला नहीं हुआ है। यह तो तेरी भूल है कि मुझसे टकरा कर विजई होगा,
मुझ तक आने से पहले ही धराशाही होगा।
मेरे ज्वलंत भृकुटी का भान नहीं तुम्हें,
मुझे असर नहीं कर पाते लम्हे,।
तू तो सठिया गया है, आग से खेलने चला है।
तुझ में बिखरे जल-जाल का हूं मैं काल,
जा हवाओं संग मिल विनोद कर लाल
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

जग से निराली

जय मां शेरावाली जग से निराली,
जय मां शेरावाली जग से निराली।
अपने भक्तों पे बरसाती है मोतियों की थाली,
जय मां शेरावाली तू है अंतर्यामी।
जय मां शेरावाली, तू है भोली भाली।
तू है दानी, सुनती है सब की फरियाद कृपा से तुम्हारे मिटे अंधेरी काली।
जय मां शेरावाली तू है जग से निराली...।1।

इस जमाने में दर बस इक तुम्हारा,
सौगात पाता जहां किस्मत का मारा।
झूठे मां सारे संसार के नाते,
किसी को बचाने जो जाते वह खुद ही डूब जाते। बचपन में ही छोड़ देता है साथ पिता,
या बुढ़ापे में बेटे को कंधा देता पिता।
बेटा ना बाप का, बाप ना बेटे का।
तेरे सिवा कौन है तू ही बता?
आंखें खोल बज उठेगी तेरे कानों की बाली,
जय मां शेरावाली तू है जग से निराली..।2।

ओ मां शेरावाली, तू है आदिशक्ति बलशाली।
उमा महिमा वाली तेरी महिमा मैं बखानूं क्या,
राई पर्वत बन जाए, रंक राजा हो जाए,
कर दे जो तू दया। आशीष तेरा जीवो पर है अपार, जीवो के खातिर तुमने रचा संसार।
ओ मैया पर्वत वाली तू भी निराली,
तेरी महिमा भी निराली।
मैया पर्वत वाली, तू है जग से निराली ।3।

*तेरे एकमात्र इशारे पर दुनिया मुस्काए,
और वक्त भी तुम्हारे दर पर दुम हिलाए।
तेरी हाथों की रेखाओं में खुशियां बेशुमार,
खिल जाए मुरझाये चेहरे हाथ फेर दे जो तू एक बार।।
तेरी पलकें झपकते सूरज डूबता,
चांद उग आता, तेरी पलक जब खुलती,
सारी दुनिया सांसे भरती।
वह मां शेरावाली, जय मां शेरावाली।
तू है जग से निराली,
है मां शेरावाली तू है जग से निराली।
अपने भक्तों पर बरसाती है मोतियों की थाली, जय मां शेरावाली...।4।✏श्रीनिवास द्विवेदी।

तू ही है

तुू ही है मेरे सांसो की पनाह,
मेरे कोरे दिल की जहांपनाह।
तुझसे है मेरी उम्मीदें, ख्वाबों की नींदें।
तराने सुनहरे अल्फाजों के तुम्हारे,
है मेरे जीने के सहारे।
मुझको अपनी बाहों में ले ले,
आजा संग मेरे जी ले।
मेरे आशाओं की किरणें अंगड़ाई ले ले ,
ले ले मुझको अपनी बाहों में।
अपनी यादों में ले ले, सांसो में बसा ले।1।

मेरे दिल की सरगम को आये ना कोई गम,
मेरी आंखें ना हो नम।
पलकों पर सजा ले, बाहों में ले ले।
मुझको अपनी सांसो में बसा ले,
जैसे पलकें आंखों को बाहों में ले ले।
ऐसे मुझको तू ले ले...।2।

तू जो दूर हो तो मेरी आंखों में मुस्काए,
पास आए तो दिल में मुस्काए।
यूं ही तेरी मुस्कान मुझे भाती रहे,
तू मुझको आंखों में अपनी सुलाती रहे।
ख्वाबों की लोरियां सुना, आ जा रे...।3।
खुशियों की हकीकत ले ले,
चाहतों की रंगत ले ले।
यादों की खुशबू ले ले, ले ले मुझको ले ले।
प्यार दे दे, खुशियों की सौगात दे दे।
ले ले तू मुझको अपनी बाहों में ले लूं...।4।

तेरी मेरी कहानी, है जन्मों पुरानी।
तू मेरा दिन है ईमान है, मेरे ख्वाबों की पहचान है। मुझको ख्वाबों की नींदें दे दे, नींदों में उम्मीदें दे दे। वह मेरे खुदा! तू ही मेरा खुदा,
दिल की मकान से होना ना जुदा।
बाहों में बाहें लेले, ख्वाबों के तराने ले ले।
ले ले तू मेरी वफाएं ले ले, ले ले तू मुझको..।5।

इश्क महके मेरा दिल चहके मेरा,
देखे जो तेरे जुल्फों के फेरा।
दिल राग बजा, तेरी है इलत्जा।
तू जो करीब हो मेरे, बुलंदी नसीब हो मेरे।
मुझको नसीबो की बुलंदी दे दे,
सांसो की करीब दे दे।
दे दे तू मुझको अपना तराना दे दे,
मुझको तू अपनी बाहों में ले ले..।6।
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

शिक्षा

शिक्षा जिनसे है कोसों दूर,
सीने तक उनके पहुंचने दो शिक्षा का नूर। खुला है रंगी आसमां,
भर उड़ान खुद को आजमा।
सवेरा होने से पहले अंधेरा होता है गहरा, अंधेरों में मशाल बनकर चलने से होता है सवेरा।
तू पहचान खुद को चुनोतियों को अवसर बना,
जुबान के पंजे ना लडावो समय से सीखो चलना।
शिक्षा सिखाती है जीना,
जीवनभर शिक्षा रस पीना।1।

निराशा की झुर्रियां है तब तक,
अपने आप पर विश्वास नहीं करते जब तक।
विश्वास का धनी अगर है बनाना,
तो abcd होगा रटना।
जिस हाथ में है शिक्षा,
उसके आसपास नहीं फटकती भिक्षा।
भारत को है विश्व गुरु बनाना,
तो होगा हिय अंधकार मिटाना।
जीवन भर शिक्षा रस पीना शिक्षा..।2।

तुम वीर हो धीर छोड़ो लकीर,
उठो संभालो अपनी तीर।
निशाने को भेदना वक्त की पुकार है,
जागृत हो चेतना युग की ललकार है।
ज्ञान का प्रकाश पुंज प्रखर हो प्रदीप्त, चुनौतियों के चेहरे हों अदीप्त।
फिर निखरेगी कामना,
आदर्शों से करेगी जो सामना।
जीवन भर शिक्षा रस पीना,
शिक्षा सिखाती है जीना..।3।

विचारों को वास्तविक रूप दो,
स्वर्णिम स्वरूप दो।
धरती से गगन तक कोई नहीं है रोक,
तुम चाहो जहां तक पूरव चौक।
एक पैर धरती पर हो एक चांद पर,
एक आंख समुद्र पर हो एक पर्वत पर।
एक हाथ में हो आसमां, दूजे में हो जहां।
यह संभव है विज्ञान हो जहां।
राष्ट्र के कोने-कोने में वैज्ञानिकों हों तब संभव होगा सपना,
जीवन भर शिक्षा रस पीना
शिक्षा सिखाती है जीना..4.
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

मेरे सपनो के राजकुंवर

वह मेरे सपनों के राजकुंवर,
मैं आ गई तेरे शहर।
मुझे बाहों में ले प्यार कर,
सपनों से कर इनकार,
अपनों से कर इकरार।
मेरे मांग का सिंदूर है तू,
मेरे जीवन का नूर है तू।
मेरी जान है तू, अभिमान है तू।
मेरे सपनों का फरमान है तू ।
मुझे बना कर अपना जीवन साथी,
सात फेरों का पहना दे कंगन,
रंग-बिरंगे फूलों से आबाद करूंगा तेरा आंगन।
यूं खींझ ना प्रेम पूजारन आई है तेरे दर,
मेरे सपनों के राजकुंवर में आ गई तेरे शहर..1.

ओ मेरे सपनों की रानी, तू है मेरी प्रेम कहानी। तुझे बाहों में ले तेरी मांग भरूंगा,
तेरे प्रेम रस का पान करूंगा।
झूमूंगा तेरे नयनों के झील में,
खुद को डूबोउगां तेरे नैनों की झील में।
ना ना ना सजना खुद को ना डूबोना,
मेरे जागते अरमानों को न तोड़ना।
तुम भी कितनी भोली हो,
बिल्कुल जैसे कली हो।
आओ कुछ बातें हों, मुलाकाते हों।
बातों का पुल बनाते हो, तुम जब मुस्कुराते हो। देखो यह हवाओं का झोंका लेकर आया है लहर, मेरे सपनों के राजकुमार...2.

जरा देखो बादल को, छोड़ो मेरे आंचल को।
सुनो हवाएं कुछ गुनगुनाए? क्या गुनगुनाए?
तुम भी गुनगुनावो, प्रीत का गीत सुनाओ।
मीत बुलाओ, जाल में फंसावो।
उसे नाचावो, वो मेहरबा आओ
तू ही मेरा प्रीत है गीत है, मेरे प्यारा गीत है।
जब राधा नाची तो कृष्ण ने छेड़ी है तान,
तू नाचेगी तो मैं बजाऊंगा ना जी ना
मेरे संग संग नाचोगे गाओगे छोड़ोगे तान।
तुझे तय करना मेरे साथ सफर,
वह मेरे सपनों के राजकुंवर...3.

(रूप बदलकर परीक्षा लेता है )
खुशबू का खजाना लिए, ढूंढे तू किसको प्रिय। (चलती जा रही है)
रूप की रानी,क्या है तेरी कहानी ?
(झिडकते हुए आगे आकर व्यंग करता है)
आलू के साले, टमाटर के लाले।
चला जा वरना पड़ जाएंगे तेरी जान के लाले,
मैं मासूम कली तू तो है बिजली।
लगता है तुझको चढ़ा है नशा,
लगाम करना होगा कसा।
(पीछे से दौड़ कर बाहों में भर कर फिर वह पीछे मुड़कर दोनों गालों पर ताक धिना धिना।बाबा फेस उतर जाता है)
हाय राम मुझसे हो गई भूल,
नहीं यह तो है मोहब्बत का फूल।
मुझे माफ कर दो, तुम जो चाहे वह सजा दे।
जरूर तुझे दूंगा सजा, बोल तेरी क्या है रजा।
या खुदा तुझे कोई गम ना हो,
संग तेरे मंजरे खुशियां हरदम हो।
तेरे हिस्से के जख्मों का खंजर मुझे चुभो दे,
मेरे खुशियों का गट्ठर तुझे दे दे।
तेरे बिना मैं रह नहीं सकता,
जुदाई का जहर पी नहीं सकता।
या खुदा हर फजल से आबाद हो मेरा शहर,
तू मेरी है शोहरेजबी मैं हूं तेरा राजकुमार...4.
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

भज ले मन तू

भज ले मन तू राम राम,
विचलित मन को मिलेगा आराम।
दिल में खुशबू गुलाब की,
मुख में बारात ख्वाब की।
हाथ का कर्म धर्म उपकार,
पग रथ अग्रसर सत्कर्म साकार।
प्रेम पुष्प अर्पित हो प्रभु चरणन में,
प्रभु संगीत समर्पित हो कानन में।
मधुर मंद मुस्कान मुख बसे नयन,
दृग दारुण दाहक श्रेष्ठ चयन।
कलिकाल कंठ कमल बसे,
वारिद विमल मोति मणि बिहसे।
निजी-निजी नयान नगर सजे,
कर कमल करतल कर बजे।
मयंक मुख मंडल बोल उठे श्री राम,
भज ले मन तू राम ...1.

पग पथ प्रेम प्रलिप्त प्रगाढ़,
जुबान छेड़े तान राम-राम दहाड़।
मन मंदिर का वासी है वह,
घट घट का निवासी है वह।
तुझ में है मुझ में है सारे जगत में है वह,
हवा का रुख बदलता है नदियों की धारा बदलता है,
किस्मत का ताला हो गया करिश्मो का खजाना सब खोलता है।
दीन भी है हीन भी है,
दानी भी है मानी भी है।
योगी भी है भोगी भी है,
ध्यानी भी है ज्ञानी भी है कौन ?
अपना श्री राम, भज मन ....2.

दया का भंडार है, करिश्मों का अंबार है।
कण-कण को करता है वह प्यार है।
स्नेह वस लेता अवतार है, भव सरी देता तार है। प्रेम रस का वह है भूखा,
केला क्या वह तो खा ले छिलका सूखा।
भक्त बस में भगवान,
झूठा बेर खाकर बने पहलवान।
लक्ष्मण का चूर्ण हुआ अभिमान,
बनी संजीवनी बेर लौटाया प्राण।
मान ना करना भाई, यह ले लेगा प्राण भाई।
बिना मान के मिलते हैं श्री राम बोलो राम राम राम, भज ले मन तू राम राम...3.

राम नाम के पावन जल से धुल ले मन की मैल, दिन आए दिन जाए बची है रैन,
सुबह का पक्षी रात हुआ अब राम नाम से मटकी भरेगा कब।
राम नाम का धनी बन कर राम नाम बांटो,
दिन दोपहर सुबह शाम पहरा आठो।
जीवन पौधे को सत्कर्म जल पिलाओ,
समृद्धि शांति का दीप जलाओ।
जन्म सफल कर अपना साकार करो रब का सपना,
हे जड़! चेतन बन जाओ, अब से जाग जाओ। प्राण धाम को सौंप दो राम को,
फिर तो मृत समझो काम को।
सौ नहीं हजार नहीं एक बार प्रेम से करो प्रणाम, खुश हो गए राम बोलो राम राम राम,
भज ले मन तू राम राम..4.
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

स्टिल मैरी

ऐसे नहीं बनेगी बात तेरी मेरी,
स्टिल मैरी समझी फैरी।
आई लाइक यू मोस्ट,
माय लाइफ इज योर होस्ट।
नजरों की बर्छी ना चले,
उससे पहले हम तुम मिलें ।
अरमान के फूल खिले,
मत रोक मेरा मन मचले।
यादों के तकिए भरे, सपनों से नजरें।
झूम-झूम के कली हमसफर से मिली,
रेतों में मुस्कान खिली।
अब तो बारी है हमारी,
ऐसे नहीं बनेगी बात तेरी मेरी..1.

आजा मेरे रस्ते मेरी बलिए,
ऐसा नहीं लगेंगे हफ्ते छलिए।
दिन मुहूर्त फिर सगाई,
तू बोले तो कल ले आऊ शहनाई।
जल्दी का भूत तुम को सता रहा है,
बाबा से मिलो मेरा सेंस बता रहा है।
बाबा की बच्ची, तू नहीं सच्ची।
हेलो काव ऑफ माय डेरी..ऐसे नही ...2.

तू-तू, मैं-मैं हुआ जो,
तीसरे का फायदा समझो।
लेबर फ्रूट्स ईट थर्ड पार्टी,
देन ड्रिंक एलोन इन पार्टी।
टेक चांस मेक बेटर,आइदर गाॅन बटर।
यू आर माई, स्टार्ट फ्लाइंग इन स्काई।
आई विल मेक यू चैन, यू आर माय ट्रिव फैन। हाउ स्वीट चिकी चियरी,
हेलो डियर आई एग्री।
ऐसे नहीं बनेगी बात तेरी मेरी...3.

झटका झटका हाय रे यह झटका,
मैं तो गया रपटा। झटका रे हाय ये झटका..। कभी ऊपर, कभी नीचे,
वह मुझको मैं उसको खींचे।
बैक होम का मारे फटका झटका झटका..। कभी मैं पकड़ू, कभी वह पकड़े।
कभी वह जकड़े, कभी मैं जकडूं।
यह तो थी पहली रात अभी से था मैं सटका। तुमसे मुझे कुछ कहना है,
ना ना तुमसे मुझे कुछ कहना है।
इस झटके में मुझे नहीं रहना है,
मुझे भी नहीं रहना है।
तेरा दिल मारे झटका, हाय रे मैं तो लटका। अरे सलोने यह तुम्हारे दिल की है धड़कन,
पर ये काहे को डाले अड़चन।
ये तो है तेरी मजबूरी ऐसे नहीं बात तेरी मेरी.4.
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

ओ गाॅड तू सी ग्रेट

वो गॉड-2 तूसी ग्रेट वो गॉड तुसी..,
यू आर ऑल थिंग्स डैड...ओ गाॅड।
मेक आल दुनिया दि नाल ,
ह्यूमन इज योर स्वीट बिल।
कर्मों के धागे से अपनी जिंदगी सिल,
गाॅड! हू इज सुप्रिम, नाॅट मेक फेस बाई क्रीम। सक्सेस, विल एण्ड पावर,
वरसिप, जयकारा एण्ड कांवर।
दे आल रूट्स टू गाॅड..ओ गाॅड...1.

जिंदगी की थैली में सच्चाई की मोती,
चुन-चुन के डाल।
अदर वाइज फ्लोर्स इन वैली,
आफ्टर ऑल नो चांस फार कॉल।
दीज आॅल गुडनेस हैबिट मेक्स कम्पलीटपर्सन।
दे आॅल प्रेजेन्टस बाय लव हर्ट् सूकेस।
ए परशन हैव समर्पण।
इन द बॉडी मेनी सैल रिवर,
ब्लड फ्लोज इन एव्ररी रिवर।
जस्ट लाइक ऑनअर्थ वाटर फ्लोज इन रिवर। जल जीवन है धरती के जीवो का,
ब्लड जीवन है अंगों का।
वर्क वर्कर इंजन एंड इंजीनियर ऑल इज गॉड, ओ गॉड तुसी ग्रेट हो गॉड...2.

सांसों की डोर, घड़ी की शोर।
इट विल नेवर बोर, कंसंट्रेट ऑन मोर।
देन नेवर ब्रेक, ब्रेक मीन क्रेक।
जो थोड़ा बहुत करके इतराते हो,
इतराने से आगे जाना भूल जाते हो।
वर्क एंड स्माइल, यू हैव लाॅट ऑफ विल।
डू वन बाई वन एंड चरणों में ईश्वर के देके खिल।
हार कर थकान से हथियार डालना,
कार्य को महत्व ना देने का होगा जुर्माना। सूरज का फरमान,
नियमित क्रियाशील ही रहना।
समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना।
खुशी से सैहलायेगा सर गॉड,
ओह गॉड तूसी ग्रेट...3.

विल ग्रोइग इन स्क्वायर,
एंड क्लोज्ड इन फायर।
हैप्पीनेस बी वॉन्ट कैप्ड इन हैंड,
बट फ्लोज बिटवीन फिंगर्स एंड मैक्स सैंड। हैप्पीनेस कम्स आफ्टर कंप्लीट वर्क,
इट्स विद हू बेरिंग सिल्वर वर्क।
एवरी थिंग गाॅन बी फेवर,
आल्सो गो विद लेबर।
वर्क फॉर गॉड ओ गॉड तुसी ग्रेट...4.
✏श्रीनिवास द्विवेदी।

किस्सा-ए-दिल

आओ दोस्तों तुम्हें किस्सा-ए-दिल सुनाऊं, अपनी जुबानी अपनी कहानी सुनाऊं।
यह जो जिंदगी है प्यारी सी कली है,
बंदगी इसकी भंवरों की मनचली।
खूबसूरत यह दिखती है जितनी,
आईने नजर में बदसूरत है उतनी।
रंजो गम के शहरों से है सजी,
सरपट जिंदगी की ट्रैफिक है बिजी।
आओ दोस्तों यह शाम सुहानी बनाऊं,
तुम्हें किस्सा यह दिल सुनाऊं....1.

सलोनी जिंदगी जब धरती पर आती है,
सजी-धजी खूबसूरत तन लिये इठलाती है।
रंग बिरंगे सपनों के वस्त्र जिसे पहना दिया जाता है, हर कोई अपने सपनों को मूर्त रुप देने लग जाता है।
प्यार के रथ पर होकर सवार निकली सवारी, जिंदगी इक जंग संभालना जुआरी।
आओ एक और नया राग पर सुनाऊं तुम्हें..2.

हसरतें दिल जिंदगी का कलमा पढ़ना,
फुर्सते-दिल जिंदगी का बलमा बनाना।
सुबह शाम हो या रात दोपहर हर वक्त सपना, सपना-2 सपने में सब खो दिया अपना।
पल पल हर पल सपना देख रहा था सपना,
ख्वाब है जिंदगी लुट गया मैं, सपने में देख रहा था सपना।
सपनों को सपना दिखाऊ दोस्त हो तुम्हें...3.

दो धार वाली तलवार जिंदगी,
दुख और सुख है इस के बंदगी।
जो हंसा तो फंसा, वक्त के रस्सी से गर्दन कसा।सुख आए तो दुख जाए, दुख आए तो सुख जाए इसमें मैं पिस।
कहीं भूल हुई बनाने वाले से, सुख-दुख के बीच जिंदगी पिसती आई है कई सालों से।
मैं सुख-दुख के गुड़गांव गाऊं दोस्तों तुम्हें...4.

जय जय सुख-दुख महाराज जय हो,
तुम्हें जो जीते वही तो मानव हो।
जय जय जय हो सुख-दुख महाराज,
तुमसे बने हैं जहां के कारज।
तेरी शरण में दुनिया सारी, तुम ही तो हो जीवन घातक आरी।
जागो मेरे सपने तुम हो मेरे अपने,
गहनों को फेंक दो जिंदगी को पैदासी रूप दो। सुख दुख को छोड़ दो अपनों से नाता जोड़ लो। सुख-दुख कल नहीं यह है आज,
जय जय जय सुख दुख महाराज।
सब मिलकर तुम्हारे गुण गाऊं.... तुम्हें कहानी सुनाऊ..5 .✏श्रीनिवास द्विवेदी।