ओ मां मेहरावाली ओ मां शेरावाली,
तू है सुख-दुख के फूलों की माली।
हो मां शेरोवाली हो मां मैहरावाली....
जब चाहे जैसे चाहे जिसे चाहे सींचती है,
जखीरे रहमतों से परदे खींचती है।
ज्ञान का भंडार लिया अज्ञान को डांटती है,
जीवन की अमृत सुधा ज्ञान बांटती है।
आंगन में नवदीप जला के,
फिराती है नजर सब पर भला के।
हजारों भुजाओं से करती है रखवाली।
ओ मां शेरावाली ओ मां मेहरावाली...1.
तेरी गोद में आंखें खुलती हैं,
उगता है सूरज राते ढलती हैं।
झूमते हैं जीव सारे उगते हैं, आसमान के तारे। बैठी है सिंहासन पर जग महारानी,
अडवल गुलाब कमल चमेली रात की रानी।
ये सब फूल हार कुछ गले में लहरें कुछ चूमे चरण, सभी ने अपनी खुशबू कर दी माॅ को अर्पण।
पाके स्नेह माँ का दुनिया हुई मतवाली,
ओ मां शेरावाली ओ मां मैहरावाली...2 .
यह लाल सभी लाल हैं तेरे कोई कहे मेरे, कोई कहे तेरे पर यह तो मां बालक हैं तेरे।
चाहे दिन हो या रात तेरे दर से हमेशा मां मिलती है सौगात।
करिश्मो से तेरे बने बिगड़ी बात, मिट जाए दुखों की काली रात।।
निकले जो भक्तों के नैनो का जल,
बना देती है भाग्य का कमल।
खो देता है जो सब अपना,
वह गर याद रखें नाम जपना।
उसके सपने भी सच हो जाते हैं, कारनामों की बात ही क्या।
बुढ़ापे में दांत उगाते हैं, जवानी की तो बात ही क्या।।
मेहर है उसका गरीबी का जहर,
निगेहबान हो मां तो क्या कर लेगा कहर।
झोली नहीं जाती कभी मां के दर से खाली
ओ मां शेरावाली ओ मां मेहरा वाली...3.
अपने बगिया को मां सजाती रहे,
जखीरों से मां पर्दे खींचती रहे।
हाथ की लकीरों को शोधती रहे,
अवगुणों को बेधती रहे।
एक छोटी सी मां मेरी भी अभिलाषा है,
फूले फले जग बस इतनी सी आशा है।
आशाओं के दीपक के नूर से मंजिलों को राह दिखाना,
खुशियों की राहों में आने वाली हर आहों को मिटाना।।
तोड़ दे किस्मत के ताले,
अंधों को भी दिखा दे उजाले।
रहमत किए हैं तूने कई निराले,
तेरे दर जाने से मिट जाते हैं मां किस्मत के छाले। हरी भरी हो हर डाली,
रहमतों से बचे न कोई खाली। तू है जग की माली...........ओ मां शेरावाली ओ मां मेहरावाली...4.✏श्रीनिवास द्विवेदी।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें