बसन्त

यह आसमान में तारों का झिलमिलाना,
  सूरज की किरणों का तिलमिलाना ।
बागों में भौरों की बारात,
मछलियों की नदियों में जमात ।
दरख़्तों पर पक्षियों का चहचहाना,
मदहोश हवाओं का मचलना।
यह है बसंत का बहाना,
झर झर पतझड़ का जाना।
सुंदर सुंदर फूल खिले हैं भारत की फुलवारी में, चह-चह  चहके पक्षी सुंदर फूल मधुर महके।
आया बसंत करके रुचि रुचि श्रंगार फुलवारी में, धूमिल हवाओं के झोंके चले बहके बहके ।
कभी लोरी सी मीठी,
तो कभी उमस  की साथी ।
चले जैसे बात झूठी,
ढूँढे पानी  सारे जंगल के हाथी।
✏श्रीनिवास द्विवेदी .

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