नाराज ना हो कोई मुझसे यही सपना तो मैंने देखा है, अपने हाथों में भी झिलमिल मोहब्बत की रेखा है।
वह नूर जिससे रोशन यह जमाना यही तो है वह दिले-आम तराना,
गाता जिसको आया है जमाना बन बैठा जिसका खुदा भी दीवाना।
सूरज मेरे सपनों को खिलने दे खिलने दे,
खुशियों को बाहों में भरने दे भरने दे।
आज मुझे जी भर सोना है, सपनों से मिलना है। रंग बिरंगे ख्वाबों के बुनने हैं कुछ ख्वाब चांद सितारों के,
पढ़ने हैं वह पन्ने जो है सपनों की किताबों के। कोई लम्हा मेरा खाली न बीते,
ख्वाबों के गीत सदा रहूं में गाते।
रात चांद को ढलने न दे ढलने ना दे सूरज मेरे सपनों को खिलने दे खिलने दे।1।
आंखों में नूर सपनों का बसा, ख्वाबों ने है कमर कसा।
सज धज के बारात चली, नैनों के हर गली गली। जैसे दूल्हे को दुल्हन मिली, खुशबू की कली खिली।
झूमते चली फिजा मिलने अफसानों को,
पहना के हार सपनों के बहारों को।
खुदा मेरे सपनों का दौर यूं ही चलने दे चलने..।2। सपनों का प्यार बसंत आ गया, खुशबू से सारा चमन छा गया।
रंग रंग के खिले हैं गुल,
तरह-तरह के सुगंध के हैं फूल।
जो चाहे चुन सकते हो,
मनपसंद हारों को बुन सकते हो।
आसमान में सब तारे हैं इंतजार में,
बहारों की रोशने-गुलजार में।
आज मुझे सपनों के साथी लम्हों से मिलने दे, सूरज मेरे सपनों को खिलने दे।3।
सावन की घटाओं से बरसा पानी,
भीगा मेरे सपनों का क्यारी।
ओड़ लिया है चूनर धानी,
महक उठी सपनों की राजधानी।
जिंदगी एक ख्वाब है देखा था जिसको खुदा ने सपने में,
वक्त की बंदिश है जिसको दिलकश तराने बुनने में।
पलकों के फर्श पर सौगातों का रेला,
नयन नगर में सज गया मेला।
वक्त के नाव पर बैठकर मैं सपनों का गांव घूम रहा हूं,
पलकों की छांव में बिस्तर पर जन्नते-बहारों में घूम रहा हूं।
वक्त मुझे दिल के तराने कहने दे कहने दे, खुदा मेरे सपनों का दौर यूं ही चलने दे।
ऐ रात चांद को ढलने ना दे,
बाहों में आज मुझे खुशी भरने दे ।
सूरज मेरे सपनो को खिलने दे।
✏श्रीनिवास द्विवेदी ।
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