यह है दुनिया की रीत,
बंदे कोई नहीं करता तुझसे प्रीत।
सब है तेरे सुख के मीत रे बंदे,
कोई नहीं है करता तुझसे प्रीत।
तेरे सुखों के है भूखे, वह खाते हैं दाने रूखे सूखे। तेरी रसमलाई, में उनकी खुशी समाई।
तेरे भाग्य के मधुर गीत से है उनकी प्रीत।1।
तेरे कर्म प्रकाश, में छुपी है सब की जीवन आस, उजाले में जिसके देते हैं अपनी राहों को सांस। तेरी मंजिल को देख है इठलाते,
तू है मेरा अपना सगा सोच हर्षाते।
पर अग्नि परीक्षा देने से है कतराते।
तेरे हिस्से की कमाई के यह बनकर बैठे हैं खाई, अपनी बारी आएगी तो नजर ना आएगी परछाई। रे बंदे यह बेपेंदी के लोटे,
जहां देखा बिस्तर वही लेटे।
यह भूख की रीत है कोई नहीं करता तुझसे प्रीत,
यह दुनिया की रीत सब है तेरे सुखों के मीत।2।
✏श्रीनिवास द्विवेदी।
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