जग से निराली

जय मां शेरावाली जग से निराली,
जय मां शेरावाली जग से निराली।
अपने भक्तों पे बरसाती है मोतियों की थाली,
जय मां शेरावाली तू है अंतर्यामी।
जय मां शेरावाली, तू है भोली भाली।
तू है दानी, सुनती है सब की फरियाद कृपा से तुम्हारे मिटे अंधेरी काली।
जय मां शेरावाली तू है जग से निराली...।1।

इस जमाने में दर बस इक तुम्हारा,
सौगात पाता जहां किस्मत का मारा।
झूठे मां सारे संसार के नाते,
किसी को बचाने जो जाते वह खुद ही डूब जाते। बचपन में ही छोड़ देता है साथ पिता,
या बुढ़ापे में बेटे को कंधा देता पिता।
बेटा ना बाप का, बाप ना बेटे का।
तेरे सिवा कौन है तू ही बता?
आंखें खोल बज उठेगी तेरे कानों की बाली,
जय मां शेरावाली तू है जग से निराली..।2।

ओ मां शेरावाली, तू है आदिशक्ति बलशाली।
उमा महिमा वाली तेरी महिमा मैं बखानूं क्या,
राई पर्वत बन जाए, रंक राजा हो जाए,
कर दे जो तू दया। आशीष तेरा जीवो पर है अपार, जीवो के खातिर तुमने रचा संसार।
ओ मैया पर्वत वाली तू भी निराली,
तेरी महिमा भी निराली।
मैया पर्वत वाली, तू है जग से निराली ।3।

*तेरे एकमात्र इशारे पर दुनिया मुस्काए,
और वक्त भी तुम्हारे दर पर दुम हिलाए।
तेरी हाथों की रेखाओं में खुशियां बेशुमार,
खिल जाए मुरझाये चेहरे हाथ फेर दे जो तू एक बार।।
तेरी पलकें झपकते सूरज डूबता,
चांद उग आता, तेरी पलक जब खुलती,
सारी दुनिया सांसे भरती।
वह मां शेरावाली, जय मां शेरावाली।
तू है जग से निराली,
है मां शेरावाली तू है जग से निराली।
अपने भक्तों पर बरसाती है मोतियों की थाली, जय मां शेरावाली...।4।✏श्रीनिवास द्विवेदी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें