आप लोग समस्याओं से भागते हैं, यह उचित है? । जब आप उन्हें बुलाते हैं और वह आपके पास आती हैं तो व्यस्तता के कारण बोलते हैं बैठिए। ठीक वैसे जैसे मेहमानों का स्वागत करते हैं। अब जब मेहमान आया है तो वह बड़ों के ना होने पर बच्चों से बात करता है और समय गुजारता है । और फिर समस्याओं का सामना बच्चों को करना पड़ता है ठीक उसी प्रकार से जैसे मेहमानों का। जब बच्चे समस्या से जूझते हैं तभी आपका कलेजा मुंह को क्यों आता है जब आप जूझते हैं तब क्यों नही? ताकि समस्या शब्द ही ईद का चांद हो जाए। विलुप्त हो जाये। आखिर यह समझौता क्यों? नहीं नहीं क्यों भाई? क्या करे पूर्वजों ने हमारे जमीर में समझोता कूट कूट-कूट कर डाल दी है ना, उससे जूझना पूरबा हवा को पछुआ हवा करने के लिए भला कौन भगीरथ प्रयास करे? कौन स्वस्थ और बुद्धिशाली समाज की गंगा को अवतरित करें। मुंह क्या देख रहे हो ये फुसफुसाहट बुजदिली है। बंद करो वर्षों पुरानी जमीयत। आओ उठो हम करेंग, आप करेंगे और मिलकर सारे साथ करेंगे। और समस्या पर शान से जीत का झंडा गाड़ देंगे। हर युग में समस्याएं थी इस युग में भी रहेगी। परंतु आपदाओं ने हीं हमें स्वावलंबी बनाया। यह नदियों के पुल, पहाड़ों के सड़क, सुरंगों में रेलवे लाइन तथा भयंकर हवाओं में पवन चक्की से ऊर्जा उत्पादन साक्षात "यत्र पिण्म तंत्र ब्रह्मांडे" को साकार करते हैं।। जो शक्ति आपदाओं को उत्पन्न करती है उसकी विपरीत शक्ति उसका निदान कर उसे मात देती है। वह शक्ति हमारे अंदर परम दिव्यता के साथ विराजमान है जो सुषुप्त हो चुकी है। उसको कुंभकर्णी नींद से जगाओ। चेत जाओ हे मानव अब कल्याणार्थ हाथ फिराओ। कालिदास, बाल्मीकि, न्यूटन, प्रिस्टले,एडिशन तथा अरस्तु यह सब कौन हैं? यह सब क्या कर गए आप सोचो इनका योगदान इन की भूमिका अपने दैनिक जीवन में? क्यों गिने चुने नाम ही हैं वह सब कहां गए जो इनके भाई माई सगे रिश्तेदार उनके साथ रहने वाले समस्त जीवधारी, मानव उनको यह श्रेय ना मिला। पूछो अपने से आपसे क्या है जो इनकी शरीर और उनके शरीर में भिन्न पदार्थों थे? क्या इनके माता-पिता इनको पढ़ाने के लिए खाने, सोने, रहने के लिह आप से बेहतर थे? आज के जैसे ट्रेनर थे? फिर कैसे आखिर कैसे?
इच्छाशक्ति सभी जिज्ञासाओं की मूल प्राप्त होती है इन प्रश्नों को हल करने पर। क्या आप में है ? ।
इच्छाशक्ति, " अपनी इच्छाओं के साथ पूर्ण समर्पण अपने स्वप्निल कार्यों को मूर्त रुप देना इच्छाशक्ति है ।"
* सर सर चली सपनों की नाव,
जिसके इच्छा शक्ति पतवार पाँव।
उनमुक्त चाल परम समर्पण,
दिखती जिसमें सफल भविष्य अर्पण । *
✏श्रीनिवास द्विवेदी ।
समस्या
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