भज ले मन तू राम राम,
विचलित मन को मिलेगा आराम।
दिल में खुशबू गुलाब की,
मुख में बारात ख्वाब की।
हाथ का कर्म धर्म उपकार,
पग रथ अग्रसर सत्कर्म साकार।
प्रेम पुष्प अर्पित हो प्रभु चरणन में,
प्रभु संगीत समर्पित हो कानन में।
मधुर मंद मुस्कान मुख बसे नयन,
दृग दारुण दाहक श्रेष्ठ चयन।
कलिकाल कंठ कमल बसे,
वारिद विमल मोति मणि बिहसे।
निजी-निजी नयान नगर सजे,
कर कमल करतल कर बजे।
मयंक मुख मंडल बोल उठे श्री राम,
भज ले मन तू राम ...1.
पग पथ प्रेम प्रलिप्त प्रगाढ़,
जुबान छेड़े तान राम-राम दहाड़।
मन मंदिर का वासी है वह,
घट घट का निवासी है वह।
तुझ में है मुझ में है सारे जगत में है वह,
हवा का रुख बदलता है नदियों की धारा बदलता है,
किस्मत का ताला हो गया करिश्मो का खजाना सब खोलता है।
दीन भी है हीन भी है,
दानी भी है मानी भी है।
योगी भी है भोगी भी है,
ध्यानी भी है ज्ञानी भी है कौन ?
अपना श्री राम, भज मन ....2.
दया का भंडार है, करिश्मों का अंबार है।
कण-कण को करता है वह प्यार है।
स्नेह वस लेता अवतार है, भव सरी देता तार है। प्रेम रस का वह है भूखा,
केला क्या वह तो खा ले छिलका सूखा।
भक्त बस में भगवान,
झूठा बेर खाकर बने पहलवान।
लक्ष्मण का चूर्ण हुआ अभिमान,
बनी संजीवनी बेर लौटाया प्राण।
मान ना करना भाई, यह ले लेगा प्राण भाई।
बिना मान के मिलते हैं श्री राम बोलो राम राम राम, भज ले मन तू राम राम...3.
राम नाम के पावन जल से धुल ले मन की मैल, दिन आए दिन जाए बची है रैन,
सुबह का पक्षी रात हुआ अब राम नाम से मटकी भरेगा कब।
राम नाम का धनी बन कर राम नाम बांटो,
दिन दोपहर सुबह शाम पहरा आठो।
जीवन पौधे को सत्कर्म जल पिलाओ,
समृद्धि शांति का दीप जलाओ।
जन्म सफल कर अपना साकार करो रब का सपना,
हे जड़! चेतन बन जाओ, अब से जाग जाओ। प्राण धाम को सौंप दो राम को,
फिर तो मृत समझो काम को।
सौ नहीं हजार नहीं एक बार प्रेम से करो प्रणाम, खुश हो गए राम बोलो राम राम राम,
भज ले मन तू राम राम..4.
✏श्रीनिवास द्विवेदी।
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