किस्सा-ए-दिल

आओ दोस्तों तुम्हें किस्सा-ए-दिल सुनाऊं, अपनी जुबानी अपनी कहानी सुनाऊं।
यह जो जिंदगी है प्यारी सी कली है,
बंदगी इसकी भंवरों की मनचली।
खूबसूरत यह दिखती है जितनी,
आईने नजर में बदसूरत है उतनी।
रंजो गम के शहरों से है सजी,
सरपट जिंदगी की ट्रैफिक है बिजी।
आओ दोस्तों यह शाम सुहानी बनाऊं,
तुम्हें किस्सा यह दिल सुनाऊं....1.

सलोनी जिंदगी जब धरती पर आती है,
सजी-धजी खूबसूरत तन लिये इठलाती है।
रंग बिरंगे सपनों के वस्त्र जिसे पहना दिया जाता है, हर कोई अपने सपनों को मूर्त रुप देने लग जाता है।
प्यार के रथ पर होकर सवार निकली सवारी, जिंदगी इक जंग संभालना जुआरी।
आओ एक और नया राग पर सुनाऊं तुम्हें..2.

हसरतें दिल जिंदगी का कलमा पढ़ना,
फुर्सते-दिल जिंदगी का बलमा बनाना।
सुबह शाम हो या रात दोपहर हर वक्त सपना, सपना-2 सपने में सब खो दिया अपना।
पल पल हर पल सपना देख रहा था सपना,
ख्वाब है जिंदगी लुट गया मैं, सपने में देख रहा था सपना।
सपनों को सपना दिखाऊ दोस्त हो तुम्हें...3.

दो धार वाली तलवार जिंदगी,
दुख और सुख है इस के बंदगी।
जो हंसा तो फंसा, वक्त के रस्सी से गर्दन कसा।सुख आए तो दुख जाए, दुख आए तो सुख जाए इसमें मैं पिस।
कहीं भूल हुई बनाने वाले से, सुख-दुख के बीच जिंदगी पिसती आई है कई सालों से।
मैं सुख-दुख के गुड़गांव गाऊं दोस्तों तुम्हें...4.

जय जय सुख-दुख महाराज जय हो,
तुम्हें जो जीते वही तो मानव हो।
जय जय जय हो सुख-दुख महाराज,
तुमसे बने हैं जहां के कारज।
तेरी शरण में दुनिया सारी, तुम ही तो हो जीवन घातक आरी।
जागो मेरे सपने तुम हो मेरे अपने,
गहनों को फेंक दो जिंदगी को पैदासी रूप दो। सुख दुख को छोड़ दो अपनों से नाता जोड़ लो। सुख-दुख कल नहीं यह है आज,
जय जय जय सुख दुख महाराज।
सब मिलकर तुम्हारे गुण गाऊं.... तुम्हें कहानी सुनाऊ..5 .✏श्रीनिवास द्विवेदी।

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