बोल हरि बोल हरि हरि बोल,
जुबां है तेरी अनमोल मीठी मिश्री घोल।
बोल हरि बोल बोल हरि बोल।1।
खुदा का करम है, मां बाप का रहम।
कहां ढूंढ रहा है बंदे दरबदर, यह तो है तेरा भरम। जरा दिल के पट खोल, हो बोल हरी बोल हरी हरी हरी बोल...।2।
यह दुनिया हरिनाम से पटे हैं इसके पोल,
तू देख जरा जर्रा-जर्रा आंखें खोल,
हर इंसान में दिखता है, वह कहीं नहीं बिकता है। प्रेम रस है उसको बहुत प्यारा, थामें है जिसका हाथ जग सारा।
दुनिया चलती है होके सवार जिस नाव पर उसका पतवार हरि,
दिखती जिससे रोशन यह दुनिया है गुलशन वह ज्योति अपार हरी।
बोल हरि बोल हरि हरि बोल बोल हरि बोल...।3। जिसकी शक्ति अपार, जीव में जो बैठा है साकार। कर उसके गुणगान, मन में लगाओ ध्यान।
सुबह-शाम डुलाओ कपोल,
बोलो हरि बोल हरि बोल हरि बोल...।4। ✏श्रीनिवास द्विवेदी।
Note-यह गाना जोगी द्वारे खड़ा मतवाला सर पर गंग अंग ममतवाला की टोन पर है। जिसको अगर लखबीर सिंह लक्खा जी का स्वर मिल जाए तो फिर कहना ही क्या।
बोल हरि बोल
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