वायु से सन्देशा

तेरे पास से आकर हवाएं रोम रोम पुलकित कर जाती हैं,
हृदय गीत के इक-इक तान का आभास मुझे कराती हैं।
तेरे सांसो की हर तान मुझे सुनाती हैं,
होठों की मिश्री को कानों में घोले जाती हैं। पल-पल की खबर मुझे दे जाती है, तेरे पास से आकर हवाएं मेरा रोम...।1।

वह सब कुछ कह जाती हैं,
जिसे तुम नहीं कर पाती हो।
वह तुझसे मेरे पास ऐसे आती हैं,
जैसे कोई पाती हो।
ऐ चंचल हवा! तू इस खुशबू को कहीं और ना पहुंचाना,
नहीं तो जमाना भी हो सकता है इसका दीवाना।
इस महेक को नजर ना लगे,
किसी और के तू गले ना लगे।
ये राज कोई न जाने कि तू संदेशा लाती है,
तेरे पास से होकर हमारे मेरा रोम ..।2।

कोयल सी बोली दिन-रात सुनाती हैं,
जन्नत की खुशबू मेरे पास बिखराती हैं।
तेरे साथ बिताए हर लम्हे याद मुझे आ जाते हैं, जिंदगी के मेरे वह भोर-पहर बन जाते हैं।
मेरे सपनों की बस तू ही है मंजिल,
तेरे सिवा कोई और नहीं है जिसको दूं दिल। तेरे ही गीतों को यह जुबा गाती है,
तेरे पास से होकर हवाएं मेरा रोम...।3।

ऐ हवा तू जा खुशबू की जहां मेरी कहानी सुना,
मेरे ख्वाबों की तू जाल बुना।
मेरे प्रेम कहानी को सुना दे तू मेरे नानी को,
मेरे चांद से मिलकर चुपके देना यादों के खजाने को।
ऐ हवा जरा आहिस्ता जा तू बनके फरिश्ता, अरमानों के सुमन हार उसको पहना देना। प्यार भरा मेरा पैगाम सुना देना,
और कहना उसकी याद सताती है।
उसके गीतों को ही यह जुबा गाती है,
तेरे पास से आकर मेरा रोम रोम पुलकित कर जाती है।
✏ श्रीनिवास द्विवेदी।
Note-यह विशेष गीत वाडेकर साहब की आवाज को समर्पित।

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